न्यूज ऑफ इंडिया (एजेन्सी) लखनऊ। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान एवं उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान द्वारा आज संस्कृत संस्थान परिसर में बाबा साहब डॉ0 भीमराव अम्बेडकर के महा परिनिर्वाण दिवस के अवसर पर ‘‘पुष्पांजलि एवं डॉ0 भीमराव अम्बेडकर का राष्ट्र निर्माण में योगदान‘‘ विषय पर व्याख्यान गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्जवलन करते हुए सरस्वती प्रतिमा को मार्ल्यापण कर किया।संस्थान के निदेशक विनय श्रीवास्तव ने कार्यक्रम में आये विद्वानों एवं श्रोताओं के साथ अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्र के निर्माण में भारत रत्न बाबा साहेब डा.भीमराव आंबेडकर का बहुत बड़ा योगदान है। जब यह देश और संविधान रहेगा, तब तक बाबा साहेब का नाम स्वर्णिम अक्षरों में अंकित रहेगा। आज देश में सरकार, संगठन और संस्थाओं का गठन भी संविधान के नियमों के तहत ही होता है। शासन और प्रशासन भी संविधान के अनुरूप चलता है और संविधान से बाहर कोई नहीं जा सकता।उक्त व्याख्यान गोष्ठी में वक्ता के रूप में आमंत्रित डॉ0 रश्मि शील, लेखिका, लखनऊ ने अपने वक्तव्य में कहा कि डॉ0 अम्बेडकर जी ने नये भारत के निर्माण में महत्वपूूर्ण योगदान दिया। उन्होंने बुद्व के प्रज्ञा, करूणा व समता के सिद्धान्त का प्रचार-प्रसार किया। श्री एम0के0 निम्बेकर, प्रेसिडेन्ट, बुद्धिष्ट सोसायटी ऑफ इण्डिया ने अपने वक्तव्य में कहा कि डॉ0 साहब ने आर्थिक उत्थान के साथ श्रमिक वर्ग व महिलाओं की स्थिति को सुधारने के लिए बड़ा कार्य किया। प्रो0 एन0के0 मोरे, प्रोफेसर, डॉ0 अम्बेडकर राष्ट्रीय विश्वविद्यालय ने अपने वक्तव्य में कहा कि सामाजिक न्याय व समता की संकल्पना के सन्दर्भ में चर्चा की। उन्होंने कहा कि आर्थिक आर्थिक समृद्धि पूर्ण समाज को बनाने के लिए मुद्रा नीति, मुद्रा कृषि एवं भारत की श्रम नीति निर्णारित करने में बाबा सहाब का सर्वाधिक योगदान रहा। डॉ0 अरूण कुमार निषाद, सहायक आचार्य, मदर टेरेसा महिला महाविद्यालय, सुल्तानपुर, डॉ0 सीता, लखनऊ द्वारा अपने-अपने विचार व्यक्त किये गये।




