हत्यारों की तलाश में पुलिस ने झोंकी पूरी ताकत फिर भी नतीजा सिफर
असेनी मोड़ पर शोएब महमूद किदवई की हुई हत्या का मामला
ए अहमद सौदागर लखनऊ। कभी पुलिस का खौफ बताने के लिए कहा जाता था। पुलिस के हाथ बहुत लंबे होते हैं और अपराधियों की गर्दन तक पहुंच ही जाती है। अब यह बीते दौर की बात होती जा रही है। बीते 13 फरवरी 2026 को बाराबंकी जिले के शहर कोतवाली क्षेत्र हाईवे के करीब असेनी मोड़ जिस तरह से असलहों से लैस बदमाशों ने माफिया मुख्तार अंसारी के करीबी अधिवक्ता शोएब महमूद किदवई उर्फ बॉबी के ऊपर गोलियों की बौछार कर मौत की नींद सुलाया, इससे यही लग रहा है कि अपराधियों के भीतर पुलिस का खौफ नहीं है।
करीब अस्सी दिनों के बीच पुलिस की टीमें मालूम नहीं कहां-कहां कातिलों की गर्दन दबोचने के लिए कई तरह की योजनाएं बनाई, लेकिन खूनियों के आगे सब बेअसर साबित होकर रह गया।
पुलिस को चुनौती देने वाली वारदात में पुलिस अबतक अंधेर में ही तीर मार रही है या फिर चुप बैठ गई।
सनद रहे कि 13 फरवरी 2026 को माफिया मुख्तार अंसारी के बेहद करीबी माने जाने वाले अधिवक्ता शोएब महमूद किदवई उर्फ बॉबी के सीने में गोलियों की बौछार कर बदमाशों ने दिनदहाड़े हत्या कर सनसनी फैला दी थी।
इस सनसनीखेज मामले की खबर मिलते ही पुलिस के आलाधिकारी मौके पर पहुंचे और मामले की छानबीन कर कातिलों की तलाश के लिए अधीनस्थों को कड़े निर्देश दिए, लेकिन इसके बावजूद भी अस्सी दिन गुजरने के बाद भी पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी।
शोएब महमूद किदवई उर्फ बॉबी के आपराधिक इतिहास पर गौर करें तो चार फरवरी 1999 को जेलर रमाकांत तिवारी हत्याकांड में शोएब किदवई का नाम सामने आया था। जेलर रमाकांत तिवारी की हत्या उस समय की गई थी जब वे लखनऊ जिलाअधिकारी के बंगले से बैठक कर वापस लौट रहे थे। बताया जा रहा है कि इस बाराबंकी निवासी शोएब महमूद किदवई उर्फ बॉबी कई सालों से वकालत करते थे और साथ ही जमीन के धंधे में भी लिप्त थे। बताया जा रहा है कि बॉबी के खिलाफ दो हत्या और गैंगस्टर सहित आधा दर्जन मुकदमे दर्ज हैं। इस मामले में पुलिस ने कातिलों की तलाश में अपनी पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी।




