August 8, 2026 2:23 am

बिजली कर्मियों के साथ किसान-मजदूर भी निजीकरण के विरोध में उतरेंगे सड़कों पर

9 जुलाई की श्रमिकों की आम हड़ताल में किसानों का समर्थन

लखनऊ। विद्युत संयुक्त कर्मचारी संघर्ष समिति के आह्वान पर देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन में संयुक्त किसान मोर्चा के संगठनों ने समर्थन दिया।

राजधानी में मध्यांचल विद्युत निगम के कार्यालय प्रांगण में क्रांतिकारी किसान यूनियन के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता झंडे-बैनर के साथ मौजूद रहे। यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष रामरतन यादव ने संबोधित करते हुए कहा कि बिजली के निजीकरण से सबसे बड़ा नुक़सान देश के करोड़ों गरीब किसान और खेत मजदूरों को है। निजीकरण के बाद महंगी बिजली बिलों का भुगतान करना उनके लिए नामुमकिन है और उनका जीवन दोबारा अंधेरे में डूब जाए। एकबार दोबारा रातें लालटेन और खेती रामभरोसे हो जाएगी। यहीं वजह है किसान और खेतीहर मजदूर पूरा ताकत के साथ बिजली के निजीकरण के खिलाफ कर्मचारियों के आंदोलन में जुटा है और सड़कों पर साथ उतरेगा।

उन्होंने आंदोलनकारी कर्मचारियों के खिलाफ झूठे मुकदमे और जांच करने की कार्यवाही को सरकार की कायराना कार्यवाही बताया। उनके साथ जिलाध्यक्ष एकादशी यादव, जिला प्रभारी दिनेश कुमार, उपाध्यक्ष विशंभर दयाल, हाजी मोहम्मद, सुरेन्द्र सिंह आदि प्रमुख किसान नेता शामिल रहे।

 

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