ए अहमद सौदागर लखनऊ। बीकेटी थाने कुछ दूरी पर स्थित रिंग रोड पर शनिवार देर रात मामपुर बाना गांव निवासी 28 वर्षीय संविदाकर्मी प्रदीप गौतम हत्याकांड के मामले में पुलिस 17 घंटे की लंबी छानबीन के बाद भी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है।
हालांकि बीकेटी पुलिस की लापरवाही के लिए यह कोई पहला मौका नहीं है, इससे पहले भी कई घटनाओं में फेल साबित हो चुकी है।
जानकार बताते हैं कि पुलिस ने संदेह के आधार पर कुछ लोगों को हिरासत में लेकर लंबी पूछताछ की, लेकिन कामयाबी नहीं मिल सकी। खास बात यह है कि थाने से चंद कदमों की दूरी प्रदीप गौतम के शरीर पर बदमाश गोलियों की बौछार कर मौत की नींद सुला दिया, लेकिन बीकेटी पुलिस क्षेत्र में ताबड़तोड़ गश्त करने का दावा करती रह गई। इस घटना ने साबित कर दिया कि पुलिस गश्त के लिए निकलती है और कहीं बैठकर गप्पे लड़ाने में जुट जाती है।
इस मामले में डीसीपी उत्तरी से संपर्क करने के लिए कोशिश की गई, लेकिन वह सीयूजी नंबर रिसीव करना मुनासिब नहीं समझा।
सनद रहे कि बीकेटी क्षेत्र स्थित मामपुर बाना गांव निवासी 28 वर्षीय संविदाकर्मी प्रदीप गौतम की शनिवार देर रात रिंग रोड पर बदमाशों ने बेरहमी से कत्ल कर मौत की नींद सुला दिया था।
इस सनसनीखेज मामले की खबर मिलते ही डीसीपी उत्तरी गोपाल कृष्ण चौधरी, एडीसीपी अमोल मुरकुट व एसीपी ज्ञानेंद्र सिंह सहित अन्य पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और मामले की गहनता से छानबीन शुरू की।
इस मामले में अफसरों ने कातिलों की तलाश में पुलिस की टीमें गठित की। पुलिस की टीमें हत्यारों की तलाश में अलग-अलग दिशाओं में खोजबीन शुरू की, लेकिन 17 घंटे बीतने के बाद भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है।




