मलिहाबाद लखनऊ । (संवाददाता) राजधानी लखनऊ के थाना मलिहाबाद की उत्तर प्रदेश की राजनीति में “सम्मान बनाम प्रशासन” की बहस एक बार फिर गरमा गई है। पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री कौशल किशोर द्वारा आयोजित “स्वाभिमान जनसभा” प्रशासन की अनुमति न मिलने और भारी पुलिस बल की तैनाती के बावजूद विशाल रूप ले चुकी है। 43 डिग्री की भीषण गर्मी में हजारों लोगों की भीड़ ने सभा स्थल पहुंचकर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया।
सभा में कौशल किशोर ने खुलकर नाराजगी जताते हुए कहा कि उनकी सुरक्षा जानबूझकर हटा दी गई है। उन्होंने प्रशासनिक रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा, “मैं 15 बार चुनाव लड़ चुका हूं, तीन जीत और 12 हारा हूं। चुनाव की चिंता नहीं है। मैं समाज के महापुरुषों के सम्मान और आत्मसम्मान की लड़ाई लड़ रहा हूं।
मुख्य मुद्दा: पासी स्मृति द्वार
पूरे विवाद की जड़ मलिहाबाद में पासी समाज के स्मृति द्वार को प्रशासन द्वारा हटाए जाने का मामला है। इस घटना के बाद पासी समाज में व्यापक आक्रोश फैल गया। कौशल किशोर और मलिहाबाद विधायक जय देवी कौशल ने पांच दिनों तक धरना-प्रवास किया। लगातार विरोध के बाद स्मृति द्वार को दोबारा स्थापित किया गया।
13 सितंबर को होगी आत्मसम्मान रैली
सभा को संबोधित करते हुए कौशल किशोर ने ऐलान किया कि 13 सितंबर* को एक बड़ी “आत्मसम्मान रैली” आयोजित की जाएगी। इस घोषणा को आगामी पंचायत और विधानसभा चुनावों से पहले दलित-बाहुल्य और पासी समाज की राजनीतिक जागरूकता का संकेत माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषक इसे महज एक स्मृति द्वार का मुद्दा नहीं, बल्कि समाज के भीतर बढ़ती सम्मान की राजनीति और जमीनी असंतोष का प्रतीक बता रहे हैं। विपक्ष इसे सरकार की कथित प्रशासनिक सख्ती से जोड़कर देख रहा है, जबकि कौशल किशोर की जमीनी पकड़ एक बार फिर साबित हुई है।
अब सबकी निगाहें 13 सितंबर की प्रस्तावित रैली पर टिकी हैं, जो प्रदेश की सियासत में नए समीकरण बना सकती है।




