मलिहाबाद, लखनऊ। (संवाददाता) राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र में पिछले पांच दिनों से चल रहा गतिरोध आखिरकार समाप्त हो गया। पासी समाज की अस्मिता और गौरव के प्रतीक महाराजा मल्हिया पासी स्मृति द्वार को प्रशासन द्वारा दोबारा स्थापित कर दिया गया है। इस जीत के बाद क्षेत्र के पासी समाज सहित सर्वसमाज में हर्ष की लहर दौड़ गई है।
बता दें कि 26 अप्रैल से ही पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर, क्षेत्रीय विधायक जय देवी कौशल और विकास किशोर (आशु किशोर) अपनी मांगों को लेकर धरने (प्रवास) पर बैठे थे। उनका स्पष्ट संकल्प था कि जब तक द्वार पुनः स्थापित नहीं होगा, तब तक यह प्रवास जारी रहेगा।
लगातार पांच दिनों तक पासी समाज और सर्वसमाज के लोगों के भारी समर्थन और जनप्रतिनिधियों की अटूट जिद के आगे आखिरकार सरकार और प्रशासन को झुकना पड़ा। पांचवें दिन प्रशासन ने उसी स्थान पर मलीहा पासी के द्वार को पुनः स्थापित करने का कार्य शुरू किया। क्षेत्र के लोगों ने इसे ‘सत्य की जीत’ और अपने गौरव की पुनर्स्थापना बताया है।
धरने में केवल पासी समाज ही नहीं, बल्कि सर्वसमाज के लोग एकजुट होकर प्रवास में शामिल रहे। द्वार स्थापित होने पर विभिन्न संगठनों और समाज के प्रबुद्ध जनों ने पूर्व मंत्री कौशल किशोर, विधायक जय देवी कौशल और विकास किशोर की जमकर सराहना की और उनका धन्यवाद किया।
“यह केवल एक द्वार नहीं, बल्कि हमारे पूर्वजों के सम्मान का प्रतीक है। पासी समाज अपनी विरासत से कोई समझौता नहीं करेगा।” — क्षेत्रीय नागरिक
द्वार की पुनः स्थापना की खबर मिलते ही न केवल मलिहाबाद, बल्कि आसपास के जिलों के पासी समाज के लोगों में भी उत्साह का माहौल है। लोगों ने फूल-मालाओं और नारों के साथ अपनी खुशी का इजहार किया और इस जीत को एकता की जीत बताया।




