शादी के महज 1 साल के भीतर वारदात, पीड़ित परिवार को मिल रही जान से मारने की धमकी
पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल, छूटे हुए आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से सहमा परिवार
मलिहाबाद, लखनऊ। (संवाददाता) राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद थाना क्षेत्र से दहेज उत्पीड़न और हत्या का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। मलिहाबाद के ग्राम तिलस्वा निवासी जोगिंदर (पुत्र स्वर्गीय चुन्नीलाल) ने पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) मलिहाबाद को एक शिकायती पत्र भेजकर अपनी तीन माह की गर्भवती पुत्री की निर्मम हत्या के आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और छूटे हुए नामों को मुकदमे में शामिल करने की मांग की है। पीड़ित पिता का आरोप है कि पुलिस की ढीली कार्रवाई के कारण बाकी आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दे रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित जोगिंदर के अनुसार, उन्होंने लगभग एक वर्ष पूर्व अपनी पुत्री रूपांशी यादव का विवाह ग्राम भूलभुल खेड़ा निवासी सुधीर (पुत्र श्रीपाल) के साथ अपनी हैसियत के अनुसार दान-दहेज देकर किया था। शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष के लोग अतिरिक्त दहेज की अनुचित मांग को लेकर रूपांशी को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने लगे।
आरोप है कि रूपांशी 3 माह की गर्भवती थी, लेकिन दहेज लोभियों को उस पर भी तरस नहीं आया। गत 24 मई 2026 की रात को पति सुधीर, ननद निहारिका, ननद प्रीति और नंदोई समर यादव ने मिलकर रूपांशी के साथ बेरहमी से मारपीट की, जिससे उसकी मौत हो गई।
मुकदमे से नाम और धाराएं छूटने का आरोप
घटना के अगले दिन यानी 25 मई 2026 को मृतका के पिता ने मलिहाबाद थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने इस मामले में मुकदमा (अपर मुख्य धाराएं 80/2, 85 बीएनएस एवं दहेज प्रतिषेध अधिनियम) तो पंजीकृत किया, लेकिन पीड़ित का आरोप है कि एफआईआर दर्ज करते समय मुख्य आरोपी नंदोई समर यादव (पुत्र उमाशंकर, निवासी ग्राम सैफलपुर) का नाम छोड़ दिया गया।
मृतका के 3 माह के गर्भ की बात और उससे जुड़ी संबंधित धाराएं भी मुकदमे में शामिल नहीं की गईं।
इसके सुधार के लिए पीड़ित पिता ने 27 मई 2026 को सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) मलिहाबाद को प्रार्थना पत्र भी दिया था, लेकिन अब तक न तो छूटे हुए आरोपी का नाम जोड़ा गया और न ही धाराएं बढ़ाई गईं।
पीड़ित पिता जोगिंदर का कहना है कि पुलिस ने मुख्य आरोपी पति सुधीर को छोड़कर बाकी किसी भी नामजद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की है, जिससे मलिहाबाद पुलिस की भूमिका संदिग्ध प्रतीत हो रही है।
“बाकी आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। हमें लगातार मोबाइल फोन और ग्रामीणों के माध्यम से केस में समझौता (सुलह) करने का दबाव बनाया जा रहा है। समझौता न करने पर पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी मिल रही है। मेरा पूरा परिवार डरा-सहमा है और हम लोग अपने ही घर में कैद होकर जीने को मजबूर हैं।”
— जोगिंदर (मृतका के पिता)
पीड़ित परिवार ने पुलिस उपायुक्त से गुहार लगाई है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराते हुए मुकदमे में छूटे हुए अभियुक्त समर यादव का नाम जोड़ा जाए, गर्भपात से संबंधित धाराएं बढ़ाई जाएं और फरार चल रहे सभी आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए।




