ए.अहमद सौदागर लखनऊ। महापर्व छठ शनिवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया है। चार दिवसीय छठ के पहले दिन पवित्रता का संकल्प लेकर घर के एक हिस्से मे जमीन पर बिछौना बिछाया गया, वहीं साफ-सुथरा चूल्हा भी अलग कर लिया गया। पति भी पत्नियों के साथ व्रत रख रहे हैं। रविवार को खरना के बाद सोमवार को डूबते सूर्य को और मंगलवार को उगते उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।
वहीं राजधानी लखनऊ के लक्षण मेला मैदान स्थित गोमती नदी किनारे घाट के अलावा अन्य घाटों पर शनिवार से ही छठी मैया के ऊंची रे अररीया, ओह पर चढ़लो ना जाए, कांच ही बांस के बहगिया, बहगी लचकत जाए, जैसे छठ के पारंपरिक गीत गुंजने लगी है।
छठ पर्व के दूसरे दिन को खरना या लोहंडा के नाम से जाना जाता है। कार्तिक महीने के पंचमी पर व्रती पूरे दिन व्रत रखते हैं। सूर्यास्त से पहले पानी की एक बूंद तक नहीं ग्रहण करते हैं।
शाम को व्रती भगवान सूर्य का पूजन कर प्रसाद अर्पित करते हैं।
शाम को चावल, गूढ़ और गन्ने के रस बने रसियाव खीर को खाया जाता है। खाने में नमक और चीनी का उपयोग नहीं किया जाता है। खास ध्यान यह भी रखना होता है कि एकांत में रहकर भोजन ग्रहण किया जाए। प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रती अपने सभी परिवारिजनों को रसियाव रोटी का प्रसाद देते हैं। चावल का पिट्ठा और घी लगी रोटी भी प्रसाद में दी जाती है। इसके बाद अगले 36 घंटों के लिए व्रती निर्जला व्रत रखते हैं। मध्य रात्रि को व्रती छठ पूजा के लिए विशेष प्रसाद ठेकुआ बनातीं हैं।




