कोशिशें तो तमाम पर नहीं थमा जानलेवा धंधे का व्यापार
ए अहमद सौदागर लखनऊ। खून का काला कारोबार, आक्सीटोसिन इंजेक्शन या फिर किडनी गिरोहों का गोरखधंधा बहुत पहले से चलता आ रहा है। इसकी रोकथाम के लिए जिम्मेदार अफसरों ने कई बार मुहिम छेड़ी, लेकिन यह जानलेवा धंधे का कारोबार थमता नजर नहीं आया।
सात अगस्त 2015 को राजधानी लखनऊ में मासूमों का खून बेचे जाने वाले बड़े रैकेट का भंडाफोड़ कर पुलिस ने चौक क्षेत्र के कंचन मार्केट स्थित कोहली ब्लड बैंक एंड कंपोनेंट्स प्राइवेट लिमिटेड में नाबालिगों को 500 रुपए थमाकर उनका खून निकाला जाता था।
इसकी शिकायत मिलने पर पुलिस-प्रशासन व डॉक्टरों की संयुक्त टीम ने ब्लड बैंक में छापा मारा तो वहां बिना किसी इंट्री के एक युवक दूसरे व्यक्ति के नाम से अपना खून देते धरा गया था।
यही नहीं राजधानी लखनऊ में किडनी कांड का भी मामला सामने आ चुका है।
पीजीआई कर्मी महबूब अली और कमिशनर कार्यालय के लिपिक अशोक पाण्डे, हरिशंकर मौर्या ये सभी आरोपी किडनी बेचने वाले गिरोह के प्यादे रहे, जबकि गिरोह का मास्टरमाइंड बिहार निवासी संतोष राय जो महंगे होटल में बैठकर गिरोह संचालित करता था।
इन गोरखधंधों का मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब ज़हर घोलने वाले आक्सीटोसिन इंजेक्शन जैसे खतरनाक नाम सामने आ गया।
एसटीएफ के डिप्टी एसपी दीपक कुमार सिंह की टीम ने रविवार को गोमतीनगर क्षेत्र के विजय खंड एक स्थित गौसुल हसन के मकान में छापेमारी की हर कोई दंग रह गया कि अरे यहां तो जहर बनाने की फैक्ट्री चल रही है।
मौके से पकड़े गए अलीगंज क्षेत्र स्थित त्रिवेणी नगर निवासी कयूम अली व मड़ियांव क्षेत्र के कदम रसूल वार्ड निवासी मोहम्मद इब्राहिम ने पुलिस को बताया कि यह लोग कुछ दिनों से बिहार राज्य से अवैध रूप से आक्सीटोसिन इंजेक्शन की तस्करी कर राजधानी लखनऊ के अलावा आसपास के जिलों में बेचते थे।
जानकारी के तौर पर एक वरिष्ठ चिकित्सक ने बताया कि यह कोई मामूली इंजेक्शन नहीं है यह बहुत ही खतरनाक किस्म का जिसे इस्तेमाल करते ही इंसान तो दूर दूधारू जानवर भी पनाह मांग लेता है।
एसटीएफ के हत्थे चढ़े दोनों आरोपी बिहार और गाजियाबाद से आक्सीटोसिन पाउडर और पैकिंग सामग्री मंगाकर अलग-अलग जिलों में सप्लाई करने की बात स्वीकार किया है।
यह जानलेवा धंधे का कारोबार कहीं और नहीं बल्कि गोमतीनगर थाने से सटे उजरियांव गांव स्थित एक मकान में चल रहा था, लेकिन स्थानीय पुलिस को जरा भी भनक नहीं लग सकी थी। एसटीएफ टीम और औषधि विभाग की टीम ने खुलासा कर स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए।




