August 8, 2026 2:15 am

मुसीबत बन रहीं भीषण आग: खतरे के मुहाने पर ऊंची इमारतें और घनी बस्तियां

बीते आठ दिनों में कई इलाकों में रहा आग का कहर

लापरवाही का नतीजा, इस दौरान पन्द्रह बच्चों की जानें भी गईं

लाखों के सामान भी हुए स्वाहा

 

ए अहमद सौदागर लखनऊ। शहर के व्यस्त क्षेत्र से लेकर लेकर बाहरी इलाके में बनीं ऊंची इमारतें, होटल, मॉल या फिर घनी बस्तियां लोगों की जिंदगियां खतरों के मुहाने पर हैं। यहां कई कोचिंग सेंटर, होटल, लॉज व ऊंची बिल्डिंगों में नियमों को दरकिनार कर धड़ल्ले से चल रहे हैं, जिनकी कोई सुध लेने वाला नहीं है। हां जिम्मेदार अफसरों की नींद टूटती है, लेकिन बड़े हादसे के बाद। इसका जीता-जागता उदाहरण अलीगंज क्षेत्र के आवासीय क्षेत्र में स्थित तीन मंजिला इमारत में लगी भीषण आग।

यहां शहरी क्षेत्र से लेकर राजधानी लखनऊ के बाहरी इलाके में कुछ ऐसी बड़ी बिल्डिंगें बनी है जो हर समय खतरे के निशान पर हैं। जबकि यहां होटल से लेकर कोचिंग सेंटर, प्लाइवुड फैक्ट्री या फिर कोल्ड स्टोरेज किसी वीरान जगहों पर नहीं, बल्कि रिहायशी इलाकों में चल रही हैं, लेकिन यहां सुरक्षा के नाम पर शुन्य के बराबर हैं। मानकों की अनदेखी और जिम्मेदार आलाधिकारियों की लापरवाही तो बीते 22 जून 2026 को देखने को मिला था।

मुहरबंद भवन पन्द्रह बच्चों के लिए कॉल बन गया था। आज भी वह स्थान भयावह सा लग रहा है, जहां देखते ही देखते मासूम बच्चों की सांसें थम गईं थीं।

अलीगंज, विकासनगर, गुडंबा, ऐशबाग, चिनहट, बीबीडी, शहर का सबसे व्यस्ततम क्षेत्र अमीनाबाद, चारबाग, आलमबाग, गोमतीनगर विस्तार, गोमतीनगर, विभूतिखंड, पारा सहित तमाम ऐसी बड़ी बिल्डिंगें, उसमें चलते व्यवसाय मानों लोगों के खतरा साबित हो रहा है। दरअसल अलीगंज, विकासनगर और चिनहट में लगी भीषण आग की घटनाओं के एक बार फिर घनी आबादी व सकरी गलियों में बने होटल, गेस्ट हाउस, ऊंची बिल्डिंगों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अलीगंज क्षेत्र स्थित तीन मंजिला इमारत में लगी भीषण आग और इसकी चपेट में आकर 15 बच्चों की हुई मौत को लेकर स्थानीय लोगों के बीच अब भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि जिम्मेदार संबंधित विभाग काश पहले चेत जाता तो बड़ा हादसा शायद नहीं होता।

गौर करें तो राजधानी लखनऊ में आग लगने से लाखों-करोड़ों का सामान तो जल कर राख हुआ, लेकिन आग की चपेट में आकर इतनी मौतें नहीं हुईं। इसे संबंधित विभाग की घोर लापरवाही कहें या फिर चंद रुपयों के लिए… हालांकि सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो टूक शब्दों में कहा कि इस अगर किसी अफसरों द्वारा लापरवाही मिली तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, लेकिन कड़वा सच यह है कि इसके बाद भी संबंधित विभाग के आलाधिकारी एवं कर्मचारी लापरवाही बरतने से बाज नहीं आ रहे हैं।

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