August 8, 2026 2:15 am

यूपी की सड़कें हुईं खूनी: जनवरी से लेकर अबतक कईयों लोगों की सड़क हादसों में गई जानें 

बीते दिनों की तरह एक बार फिर 24 घंटे के भीतर सड़क हादसे में 18 लोगों से अधिक लोगों की हुई मौत 

सिलसिलेवार तरीके से हो रही सड़क दुघर्टनाओं से साफ है कि हत्यारों से बेरहम हो गई सूबे की सड़कें 

 

ए अहमद सौदागर लखनऊ। बुधवार रात साढ़े आठ बजे मिर्जापुर जिले में एक साथ ट्रकों और बोलेरो की टक्कर में 11 लोगों की जिंदा जल कर मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे का मामला शांत भी नहीं पड़ा था कि लखीमपुर-खीरी जिले में श्रद्धालुओं से ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने से उसमें सवार छह लोगों की मौत हो गई जबकि कई लोग बुरी तरह से जख्मी हो गए।

बीते दिनों और हाल में यूपी के अलग-अलग जिलों में सड़क हादसों में कईयों लोगों की मौत से साफ है कि यहां की सड़कें किसी हत्यारों से कम नहीं है।

सूबे की सड़कों पर दौड़ रहीं तेज रफ्तार बेलगाम वाहन मानों जान के लिए खतरा बनती जा रही है। बताया जा रहा है ये दुर्घटनाएं उस समय होती हैं जब चालक एक-दूसरे को पीछे करने में जुट जाते हैं, नतीजतन इस लापरवाही के चलते न जाने कितने परिवार के घरों में मातम छा गया।

यूपी की सड़कों पर नजर डालें तो तकरीबन हर हाईवे पर स्पीड ब्रेकर बना होने के साथ सीसीटीवी कैमरा भी लगा है। कैमरा अगाह करता है कि आप लिमिट से बाहर वाहन लेकर जा रहें हैं, लेकिन इसके बावजूद भी बस, ट्रक या फिर कार चालक तेज़ रफ़्तार से वाहन चलाने से बाज नहीं आ रहे हैं।

मिर्जापुर जिले में बुधवार रात सवारी से भरी बोलेरो ढाल पर उतर रही थी कि इसी दौरान तेज रफ्तार ट्रक ने टक्कर मारी और एक साथ तीन गाड़ियां आपस में भिड़ गई। टक्कर इतनी तेज थी कि बोलेरो में आग लगी और उसमें सवार 11 लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।

इस मामले की चर्चा खत्म भी नहीं हुई थी कि गुरुवार को लखीमपुर-खीरी जिले में श्रद्धालुओं से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित होकर पलट गई। इस हादसे में छह लोगों की मौत हो गई।

गौर करें तो इससे पहले सात फरवरी 2026 को मथुरा जिले में यमुना एक्सप्रेस वे पर कंटेनर और बस की टक्कर में छह लोगों की मौत हो गई।

16 मार्च 2026 को लखनऊ आगरा एक्सप्रेस वे कंटेनर की टक्कर से दंपति की मौत।

23 फरवरी 2026 को राजधानी लखनऊ के गोसाईगंज क्षेत्र के पूर्वांचल एक्सप्रेसवे बिहार जा रही डबल डेकर बस अनियंत्रित होकर पलट गई। इस हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई जबकि चालीस से अधिक यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए।

10 दिसम्बर 2025 को बाराबंकी पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर दो कारों की टक्कर में मां और चार बच्चों की जिंदा जल कर मौत हो गई।

16 दिसंबर 2025 को यमुना एक्सप्रेस वे एक साथ 11 वाहनों की टक्कर में 13 लोगों की जिंदा जल कर मौत हो।

यह तो महज बानगी भर है इससे पहले भी सड़क हादसों में कईयों लोगों की जानें जा चुकी हैं।

 

,,, डीजीपी ने सड़क दुघर्टनाओं की जांच के लिए हर संवेदनशील थानों में विशेष टीम गठित करने के दिए थे आदेश,,

 

पुलिस महानिदेशक का फरमान फाइलों में दफन हो कर रह गया

 

सूबे में सड़क हादसों में बढ़ती मृत्यु दर को कम करने के लिए बीते नवंबर महीने में यातायात नियमों में सख्ती से अधीनस्थों को चौकन्ना रहने का फरमान जारी किया था, लेकिन गौर करें तो सख्ती के बाद भी अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहा है। हाईवे से लेकर बड़े महानगरों में यातायात व्यवस्था की बदहाली भी चिंता की लकीरें खींचती रहती है। जिस तरह से यूपी की सड़कों पर आए दिन किसी न किसी की सड़क हादसों में मौतें हो रही है। इससे यही लग रहा है कि डीजीपी राजीव कृष्ण का फरमान अधीनस्थों के लिए मायने नहीं रखता।

63
Default choosing

Did you like our plugin?

error: Content is protected !!