August 8, 2026 2:20 am

यूपी पुलिस की सक्रियता पर एक नजर: अपराधों पर नहीं है खाकी का अंकुश

सड़क पर गोलियों की बौछार करने वाले बने चुनौती 

शूटरों ने जब चाहा और जहां चाहा संगीन वारदातों को दिया अंजाम 

पहले भी बदमाशों ने खूब बरसाईं गोलियां और पुलिस गश्त का दावा करती रही 

 

ए अहमद सौदागर लखनऊ। 27 अक्टूबर 2010- विकासनगर में सीएमओ परिवार कल्याण डॉ विनोद कुमार आर्या की बदमाशों ने उस समय गोलियों से भूना जब वे घर से मार्निंग वॉक पर निकले थे।

दो अप्रैल 2011- सीएमओ परिवार कल्याण डॉ विनोद कुमार आर्या की हत्या के करीब पांच माह बाद सीएमओ परिवार कल्याण डॉ बीपी सिंह को भी उस समय असलहों से लैस बेखौफ बदमाशों ने निशाना बनाया था जब वे विभूतिखंड क्षेत्र में घर से मार्निंग वॉक पर निकले थे।

दो मार्च 2011- जगत नारायण रोड स्थित चौधरी गडहिया निवासी सरकारी मुलाजिम सैफ हैदर उर्फ सैफी की बदमाशों ने शिक्षा भवन के सामने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर बदमाशों ने मौत की नींद सुला दिया।

11 फरवरी 2026 को रामपुर जिले के जिला पंचायत कार्यालय में बुधवार को अधिवक्ता फारूक अहमद को गोलियों से भून दिया गया।

इस सनसनीखेज का मामला शांत भी नहीं पड़ा था कि 13 फरवरी 2026 को बाइक सवार बदमाशों ने मुख्तार अंसारी के करीबी और जेल अधीक्षक आरके तिवारी हत्याकांड के मुख्य आरोपी एवं बाराबंकी जिले की कोतवाली नगर के हिस्ट्रीशीटर शोएब किदवई उर्फ बॉबी को सफेदाबाद क्षेत्र स्थित असेनी मोड़ पर गोलियों से छलनी कर मौत की नींद सुला दिया।

रामपुर और बाराबंकी जिले में दो अधिवक्ताओं की दिनदहाड़े हुई हत्या ने एक बार फिर पुराने जख्मों को ताजा कर दिया।

सवाल है कि पुलिस के आलाधिकारी भले ही अपराध और अपराधियों पर लगाम लगाने के लिए हर महीने समीक्षा बैठक कर रहे हों, लेकिन कड़वा सच यह है कि निशानेबाज शूटरों के आगे पूरी कवायदें घुटने टेक कर रह गई और बेखौफ बदमाश अपने नापाक इरादों में कामयाब होकर फुर्र हो जा रहे हैं।

दो सीएमओ डॉ विनोद कुमार आर्या, डॉ बीपी सिंह और सरकारी मुलाजिम सैफ की हत्या के बाद अपराध और अपराधियों पर नकेल कसने के लिए न जाने कितने तरह की पुलिस अफसरों ने रणनीति तैयार की, लेकिन सब बेअसर साबित हुआ। नतीजतन आज भी बेखौफ बदमाशों का कहर बरकरार है जो थमने का नाम नहीं ले रहा है।

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