August 8, 2026 2:15 am

यूपी में कुपोषण के खिलाफ जंग: मंत्री बेबी रानी मौर्य ने किया ‘संभव अभियान 6.0’ का आगाज

इस बार जीवन के पहले 1,000 दिनों पर रहेगा विशेष फोकस

 

लखनऊ। न्यूज़ ऑफ इंडिया (एजेंसी) प्रदेश संरकार ने बच्चों और महिलाओं में कुपोषण के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हुए गुरुवार को ‘संभव अभियान 6.0’ की शुरुआत की। महिला एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य ने स्थानीय होटल में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में इस अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक इच्छाशक्ति व अंतरविभागीय समन्वय के कारण ही प्रदेश ने बीते आठ साल में तकरीबन 15 प्रतिशत कुपोषित बच्चों का उपचार कर उनको सेहतमंद बना दिया है। इस अवसर पर बीते साल ‘संभव अभियान 5.0’ सबसे अच्छा काम करने वाले पांच जिलों कानपुर नगर, फर्रुखाबाद, श्रावस्ती, चंदौली व वाराणसी के जिला कार्यक्रम अधिकारी और मुख्य चिकत्साधिकारी के साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाले एक सीडीपीओ, एक आंगनवाड़ी कार्यकत्री और एक सहायिका को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर मंत्री जी ने सम्भव पैकेज और सोशल मीडिया पैकेज का विमोचन किया, जिसमें सम्भव अभियान के जिला-स्तरीय क्रियान्वयन से संबंधित योजना उपकरण तथा नवजात शिशुओं, बच्चों और गर्भवती महिलाओं में कुपोषण से संबंधित तकनीकी हैंडआउट/सोशल मीडिया सामग्री शामिल हैं। मंत्री जी ने गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, शिशुओं और बच्चों को नए टेक होम राशन (ज्भ्त्) पैकेट भी वितरित किए तथा इस अवसर पर नवीन पोषाहार से बनाये गए विभिन्न रेसिपी के स्टाल का अवलोकन भी किया गया। उन्होंने रणवीर ब्रार जैसे प्रसिद्ध शेफ को प्रदर्शित करने वाली वीडियो श्रृंखला का भी विमोचन किया, जो ज्भ्त् के विभिन्न पैकेट के उपयोग से पौष्टिक व्यंजन बनाने को बढ़ावा देती है।

आईसीडीएस निदेशक सुश्री हर्षिता माथुर ने “प्रयास से प्रभाव तक” विषय पर एक सत्र प्रस्तुत किया, जिसमें वर्ष 2021 से 2025 तक संभव अभियान की यात्रा तथा संभव 6.0 के प्रमुख स्तंभों पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में संभव अभियान के अंतर्गत प्रतिमाह औसतन 1.7 करोड़ बच्चों की स्क्रीनिंग की गई, 14 लाख से अधिक बच्चों का उपचार किया गया तथा गंभीर तीव्र कुपोषण से ग्रस्त 81 प्रतिशत बच्चे स्वस्थ होने में सफल रहे। इस वर्ष यह अभियान जुलाई से सितंबर तक प्रदेश के सभी 75 जिलों में संचालित किया जाएगा।

कैबिनेट मंत्री श्रीमती बेबी रानी मौर्य ने आईसीडीएस और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इन प्रयासों से गर्भवती महिलाओं, शिशुओं और छोटे बच्चों में कुपोषण की रोकथाम की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। संभव अभियान अब अपने छठे वर्ष में प्रवेश कर चुका है। इस वर्ष की थीम “गर्भावस्था से बाल्यावस्था तक पोषण सुरक्षा” रखी गई है, जो जीवन के पहले 1,000 दिनों-गर्भावस्था के 270 दिन और जन्म के बाद 730 दिन पर विशेष ध्यान केंद्रित करती है। यही वह महत्वपूर्ण अवधि है, जिसमें बच्चे के मस्तिष्क का लगभग 80 प्रतिशत विकास होता है और इस समय कुपोषण से होने वाला नुकसान आगे चलकर पूरी तरह सुधारा नहीं जा सकता।

यूनिसेफ के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश के सभी 75 जिलों से जिला कार्यक्रम अधिकारी, विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और पोषण क्षेत्र में कार्यरत विकास साझेदारों ने भाग लिया। अपर मुख्य सचिव (महिला एवं बाल विकास) लीना जौहरी ने कहा कि अब चुनौती केवल सेवाओं की उपलब्धता नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता और लोगों की पोषण संबंधी आदतों में सुधार की है। बड़ी संख्या में महिलाएं गर्भावस्था के समय कुपोषित या कम वजन की होती हैं, जिसके कारण बच्चों का जन्म कम वजन के साथ होता है और उनमें कुपोषण का खतरा बढ़ जाता है। संभव 6.0 इसी अंतर को दूर करने का अहम प्रयास है।

उन्होंने कहा कि सम्भव 6.0 के अंतर्गत इस वर्ष गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं की पोषण देखभाल, कम वजन के नवजात शिशुओं की विशेष देखभाल, ‘छह माह, सात बार’ रणनीति के तहत शिशुओं के लिए नियमित गृह भ्रमण, तथा गंभीर कुपोषित बच्चों की समय पर पहचान और उपचार पर विशेष जोर दिया जाएगा। साथ ही, समुदाय आधारित प्रबंधन प्रणाली को और सुदृढ़ किया जाएगा, ताकि कुपोषित बच्चों को समय रहते उपचार और उचित देखभाल उपलब्ध हो सके।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक डॉ पिंकी जोवेल ने एनएफएचएस के ताजा आंकड़ों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि मातृ मत्यु दर बढ़ना इस ओर इंगित करता है कि इसको कम करने के लिए आईसीडीएस व स्वास्थ्य विभाग का समन्वय जरूरी है। दोनों विभाग बेहतर समन्वय स्थापित करेंगे तो तीन साल बाद अगले एनएफएचएस सर्वे में मातृ मृत्यु दर के आंकड़े भी कम दिखेंगे।

आईसीडीएस की निदेशक हर्षिता माथुर ने बताया कि इस वर्ष अभियान में पंचायती राज, योजना विभाग और सूचना विभाग को भी औपचारिक रूप से जोड़ा गया है, जिससे समन्वित प्रयासों को और गति मिलेगी। उन्होंने बताया कि जहाँ पंचायती राज विभाग गांव स्तर पर जनभागीदारी को मजबूत करेगा, वहीं योजना विभाग कार्यक्रम की समीक्षा और आंकड़ों के सत्यापन की जिम्मेदारी निभाएगा और सूचना विभाग व्यापक जनजागरूकता तथा व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देगा।

पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित सिंह ने अपनी प्रस्तुतिकरण में पंचायत सखी को संभव अभियान से जोड़ कर इस कार्यक्रम को सफल बनाने पर ज़ोर दिया। कार्यक्रम में महिला व बाल विकास विभाग की सचिव मनीषा त्रिघाटिया, महानिदेशक परिवार कल्याण डॉ एचडी अग्रवाल, एचएचएम के महाप्रबंधक डॉ मिलिंद वर्धन ने भी अपने प्रजेंटेशन दिए।

यूनिसेफ की ओर से पोषण विशेषज्ञ रबी नारायण ने राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि पोषण केवल भोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अवसर, समानता, मानव संसाधन के विकास और बच्चों के अधिकारों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि हर बच्चे को स्वस्थ और पोषित जीवन प्रदान करना उत्तर प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है। कार्यक्रम का संचालन संयुक्त निदेशक (आईसीडीएस) श्रीमती अनुपमा शांडिल्य द्वारा किया गया तथा संभव अभियान की सहायक नोडल अधिकारी श्रीमती पारुल शुक्ला, संयुक्त परियोजना समन्वयक, पोषण अभियान द्वारा कार्यक्रम के संचालन में सहयोग किया गया। संभव अभियान के राज्य नोडल अधिकारी आईसीडीएस विभाग के उप निदेशक सेराज अहमद द्वारा कार्यक्रम के समापन पर सभी विशिष्ट अतिथियों, गणमान्य व्यक्तियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया।

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