November 3, 2026 7:55 pm

योगी सरकार में माटीकला को प्रोत्साहन: लखनऊ में 28 अक्टूबर से शुरू होगा 11 दिवसीय ‘माटीकला महोत्सव-2026’

न्यूज ऑफ इंडिया (एजेंसी) लखनऊ। उत्तर प्रदेश अपनी प्राचीन, समृद्ध और विविध शिल्पकला के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। यहाँ का हस्तशिल्प न केवल सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था में भी बड़ी भूमिका निभाता है। इसी बात को ध्यान में रखकर ‘मिट्टी से संस्कृति, संस्कृति से समृद्धि’ की थीम पर डालीबाग स्थित खादी भवन में 7 नवम्बर तक भव्य प्रदर्शनी लगेगी। इसका उद्घाटन कैबिनेट मंत्री राकेश सचान 28 अक्टूबर को सायं 4 बजे करेंगे । इस प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह में प्रमुख सचिव अनिल कुमार सागर रहेंगे उपस्थित रहेंगे। इस प्रदर्शनी में विभिन्न जनपदों के उत्कृष्ट शिल्पकारों द्वारा निर्मित माटीकला उत्पाद प्रदर्शित किये जाएंगे। उल्लेखनीय है कि *देश के कुल हस्तशिल्प निर्यात में उत्तर प्रदेश अकेले लगभग 44% का योगदान देता है। यह दर्शाता है कि राज्य का शिल्प क्षेत्र केवल एक सांस्कृतिक पहलू नहीं, बल्कि विदेशी मुद्रा कमाने का बड़ा इंजन है।* *कारपेट (कालीन) क्षेत्र में राज्य की हिस्सेदारी देश के कुल कारपेट निर्यात का 39% है, और चमड़े (Leather) की वस्तुओं (विशेषकर आगरा और कानपुर) के निर्यात में लगभग 26% की हिस्सेदारी है।

उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड द्वारा इस प्रदर्शनी को राजधानी लखनऊ में आगामी 28 अक्टूबर से 07 नवम्बर 2026 तक ‘माटीकला महोत्सव-2026’ के रूप में आयोजित किया जा रहा है। पारंपरिक शिल्पकारों को सीधा मंच उपलब्ध कराने तथा माटीकला को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित इस महोत्सव की मुख्य थीम ‘मिट्टी से संस्कृति, संस्कृति से समृद्धि’ रखी गई है। उत्तर प्रदेश की कला व शिल्प न केवल भारत में अपितु पूरे विश्व में प्रसिद्ध है | सिल्क साड़ियों से लेकर मिट्टी के बर्तन, कालीन बुनाई से लेकर चिकनकारी तक उत्तर प्रदेश सदैव हस्तशिल्प के मोर्चे पर अग्रणी रहा है। लखनऊ की चिकनकारी हो , मुरादाबाद में पीतल के बर्तनों की कला हो, फिरोजाबाद काँच की वस्तुएँ हों, सहारनपुर का वुड क्राफ्ट हो , उत्तर प्रदेश की अद्वितीय शिल्पकला का नमूना हर जगह दिखाई देता है। आपको बता दें कि *कृषि के बाद हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र उत्तर प्रदेश में ग्रामीण और अर्ध-शहरी आबादी को सबसे अधिक रोजगार देता है। इसमें महिलाओं की बड़ी भागीदारी है (विशेषकर चिकनकारी, मूंज क्राफ्ट और कालीन क्षेत्र में)।

इसलिए उत्तर प्रदेश सरकार उपरोक्त वर्णित महोत्सव के अंतर्गत आयोजित होने वाली माटीकला उत्पादों की भव्य प्रदर्शनी का औपचारिक उद्घाटन बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को सायं 04.00 बजे उ०प्र० माटीकला बोर्ड, खादी भवन प्रांगण, 8-तिलक मार्ग, डालीबाग, लखनऊ में संपन्न करेगी । इस राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रदेश के खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान द्वारा मुख्य अतिथि के रूप में किया जाएगा। 28 अक्टूबर से 07 नवम्बर 2026 तक चलने वाले इस 11 दिवसीय महोत्सव में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए सिद्धहस्त शिल्पकारों द्वारा निर्मित उत्कृष्ट माटीकला उत्पादों की भव्य प्रदर्शनी लगाई जाएगी।

उ०प्र० माटीकला बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी शिशिर ने सभी नागरिकों, कला प्रेमियों एवं संभ्रांतजनों से अपील की है कि वे इस अवसर पर खादी भवन प्रांगण में पधारकर स्थानीय शिल्पकारों द्वारा निर्मित उत्कृष्ट उत्पादों का अवलोकन करें और उनका उत्साहवर्धन करें।

उत्तर प्रदेश की शिल्पकला प्राचीन इतिहास, गंगा-जमुनी तहज़ीब और बेजोड़ हुनर का एक ऐसा जीवंत दस्तावेज़ है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था और वैश्विक बाज़ार में एक मजबूत हिस्सेदारी रखता है। राज्य के विभिन्न जिलों में विकसित हुए हस्तशिल्प न केवल स्थानीय संस्कृति को दर्शाते हैं, बल्कि देश की निर्यात आय में भी बड़ा योगदान देते हैं।

उत्तर प्रदेश की प्रमुख शिल्पकलाएं और उनके मुख्य केंद्र

उत्तर प्रदेश के प्रत्येक ज़िले की अपनी एक विशेष पहचान है, जिसे सरकार की ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) योजना के तहत और मजबूती मिली है:

चिकनकारी और जरदोजी (लखनऊ/बरेली): लखनऊ की चिकनकारी कपड़ों पर महीन सूती धागों से की जाने वाली एक विश्वप्रसिद्ध पारंपरिक नक्काशीदार कढ़ाई है। वहीं जरदोजी में सोने-चांदी के धातु के धागों का उपयोग करके कपड़ों को हैवी लुक दिया जाता है।

कालीन बुनाई (भदोही, मिर्जापुर): भारत के कुल कालीन निर्यात का लगभग 39% से अधिक हिस्सा उत्तर प्रदेश के भदोही और मिर्जापुर क्षेत्र से आता है। भदोही को “कालीनों का शहर” (Carpet City) भी कहा जाता है।

पीतल शिल्प (मुरादाबाद): मुरादाबाद को वैश्विक स्तर पर “पीतल नगरी” (Brass City) के नाम से जाना जाता है। यहाँ पीतल के बर्तनों और मूर्तियों पर ‘नक्काशी’ (Nakashi) और ‘खुदाई’ का बेहतरीन काम होता है।

कांच शिल्प (फिरोजाबाद):फिरोजाबाद को भारत की “सुहाग नगरी” या “चूड़ियों का शहर” कहा जाता है। यहाँ सदियों से कांच पिघलाकर चूड़ियाँ, झूमर और कलाकृतियाँ बनाई जाती हैं।

बनारसी ब्रोकेड और रेशम शिल्प (वाराणसी) : बनारसी रेशमी साड़ियों पर सोने और चांदी के तारों (जरी) से जटिल ताने-बाने की बुनाई की जाती है, जो इसे भारत की सबसे महंगी और राजकीय वस्त्र कलाओं में से एक बनाती है।

टेराकोटा और पॉटरी (गोरखपुर, खुर्जा और निजामाबाद) : गोरखपुर का ‘टेराकोटा शिल्प’ (मिट्टी के सजावटी जानवर) अपनी प्राकृतिक बनावट के लिए जाना जाता है, जबकि बुलंदशहर का खुर्जा अपनी उत्कृष्ट सिरेमिक पॉटरी के लिए प्रसिद्ध है।

काष्ठ शिल्प और मूंज क्राफ्ट : सहारनपुर और बिजनौर अपनी शीशम व अन्य लकड़ियों पर बारीक नक्काशी (Wood Carving) के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं, जबकि प्रयागराज व सुल्तानपुर क्षेत्रों में प्राकृतिक मूंज घास से सुंदर टोकरियां और और घरेलू उत्पाद बनाए जाते हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार की ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) योजना ने हर जिले के मुख्य शिल्प की ब्रांडिंग को वैश्विक स्तर पर पहुँचाया है। बनारसी साड़ी, भदोही कालीन और मुरादाबाद ब्रास जैसी कई कलाकृतियों को जीआई (भौगोलिक संकेतक) टैग मिलने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी नकली कॉपियों पर रोक लगी है। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो’ जैसे आयोजनों ने इन पारंपरिक शिल्पों को सीधे विदेशी खरीदारों से जोड़कर जरदोजी, पीतल और काष्ठ शिल्पकारों को एक नया जीवनदान दिया है।

उत्तर प्रदेश का शिल्प उद्योग केवल अतीत की विरासत नहीं बल्कि वर्तमान की आर्थिक शक्ति है। यदि पर्यावरण के अनुकूल मूंज और टेराकोटा जैसे शिल्पों को आधुनिक डिजाइनों के साथ जोड़कर वैश्विक स्तर पर प्रमोट किया जाता रहा, तो मशीनी युग में भी उत्तर प्रदेश के इन हुनरमंद हाथों का जादू कभी फीका नहीं पड़ेगा।

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