ए अहमद सौदागर लखनऊ। राजधानी लखनऊ में बुजुर्ग महिला या पुरुष महफूज़ नहीं हैं। पुलिस ने अपने घरों में अकेले रहने वाले बुजुर्गों की सुरक्षा की कवायद तो कई बार शुरू की, लेकिन चंद दिनों बाद योजनाएं फाइलों में दबकर रह गई। यही वजह है कि उनके साथ एक के बाद एक हो रही घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रहीं।
जानकीपुरम क्षेत्र के जानकी विहार स्थित युनाइटेड सिटी में रहने वाली बुजुर्ग महिला नीलिमा श्रीवास्तव की हत्या ने एक बार फिर बुजुर्गों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस इस हत्याकांड के पीछे किसी करीबी का हाथ मान रही है। इस सनसनीखेज वारदात ने एक बार फिर साबित कर दिया कि लखनऊ में अपने घरों में अकेले रहने वाली बुजुर्ग महिला या पुरुष महफूज़ नहीं हैं।
पुलिस ने बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए कई बार कवायद शुरू की।
गौर करें तो वर्ष 2005 में तत्कालीन एसएसपी नवनीत सिकेरा के बाद से पुलिस के कई पुलिस अफसरों ने बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए खाका तैयार किया, लेकिन सारी कवायदें थानेदारों के साथ होने वाली बैठकों तक ही सिमट कर रह गई।
तत्कालीन एसएसपी व वर्तमान पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने भी एक स्वयं सेवी संस्था के माध्यम से बुजुर्गों व उनके नौकरों के सत्यापन की कवायद शुरू की थी। बीते दिनों और हाल में हुई वारदात से साफ है कि बुजुर्गों को सबसे अधिक खतरा अपने उन करीबियों से है जिन पर वे सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं। इस पहले हुई कई घटनाओं का पुलिस ने खुलासा किया तो अधिकतर अपनों का ही चेहरा सामने आया है। किसी ने रूपयों की लालच में तो किसी ने जमीन हड़पने के लिए अपनों को ही मौत की नींद सुला दिया।




