August 8, 2026 2:10 am

​राष्ट्रीय धर्म सेना कार्यालय में चंद्रशेखर आज़ाद और बाल गंगाधर तिलक की जयंती धूमधाम से मनाई गई

लखनऊ। (संवाददाता) राष्ट्रीय धर्म सेना के राष्ट्रीय कार्यालय में आज महान क्रांतिकारी, अमर शहीद पंडित चंद्रशेखर आज़ाद जी एवं लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी की जन्म जयंती श्रद्धा, सम्मान एवं राष्ट्रभक्ति के वातावरण में मनाई गई।

 

कार्यक्रम में उपस्थित सभी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने दोनों महापुरुषों के चित्र पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

 

पंडित चंद्रशेखर आज़ाद जी को याद करते हुए राष्ट्रीय धर्म सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री आशीष तिवारी ने कहा कि आजाद जी का जीवन त्याग, साहस, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति की अद्वितीय मिसाल है। 23 जुलाई 1906 को जन्मे चंद्रशेखर आज़ाद ने किशोरावस्था में ही स्वतंत्रता संग्राम का मार्ग चुना और अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी। उन्होंने यह प्रण लिया था— “मैं आज़ाद हूँ, आज़ाद रहूँगा और आज़ाद भारत देखूँगा।”

 

राष्ट्रीय धर्म सेना के राष्ट्रीय महामंत्री श्री राजेंद्र गुप्ता ‘शिमला परिवार’* ने कहा कि आजाद जी ने हमें स्वाभिमान से जीना सिखाया।

 

इस अवसर पर पत्रकार श्री राकेश शर्मा, श्री अभय गुप्ता, संतराम गुप्ता निषाद पार्टी के उपाध्यक्ष श्री संजय निषाद, श्री सोनू गोस्वामी, श्री राजू यादव, श्री राजेश कुमार सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारियों ने चंद्रशेखर आज़ाद जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

 

उन्होंने कहा कि मात्र 15 वर्ष की आयु में महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में भाग लेने पर उन्हें जेल भेजा गया। जब न्यायालय ने कोड़ों की सज़ा सुनाई, तब प्रत्येक कोड़े के साथ उन्होंने “भारत माता की जय” का उद्घोष कर अपने अदम्य साहस का परिचय दिया।

 

वक्ताओं ने 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में दिए गए उनके सर्वोच्च बलिदान को याद करते हुए कहा कि चारों ओर से अंग्रेजों से घिर जाने के बावजूद उन्होंने लगभग 30 मिनट तक वीरतापूर्वक संघर्ष किया और अंत में अपने प्रण को निभाते हुए कहा— “दुश्मन के हाथ नहीं आऊंगा।” इसके बाद उन्होंने अपनी अंतिम गोली स्वयं पर चलाकर मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।

 

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी के बारे में बोलते हुए कहा गया कि उन्होंने “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है” का नारा देकर पूरे देश में स्वतंत्रता की चेतना जगाई। तिलक जी ने गणेश उत्सव और शिवाजी जयंती के माध्यम से जनता में राष्ट्रभक्ति का भाव भरा।

 

कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने राष्ट्र की एकता, अखंडता और गौरव की रक्षा के लिए समर्पित होकर कार्य करने का संकल्प लिया।

63
Default choosing

Did you like our plugin?

error: Content is protected !!