मलिहाबाद लखनऊ। जहां एक तरफ देश व प्रदेश की सरकार स्वच्छ भारत मिशन के तहत साफ सफाई को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में करोड़ों रुपए पानी की तरह बहा रही है। लेकिन अफसोस ब्लॉक में एसी के कमरे में बैठे अधिकारियों के कानों में जूं तक नहीं रेंग रहा है। जिम्मेदारों द्वारा सरकार की नीतियों पर पानी किस तरह फेरा जा रहा है, ये इस खबर से आप जान जाएंगे। ताजा मामला उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के विकासखंड काकोरी क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत खुशहाल गंज से सामने आया है। जहां जल भराव की समस्या जस की तस बनी हुई है। कई बार अखबार में खबर प्रकाशित होने के बावजूद भी कर्मचारी एवं अधिकारियों मनमानी के चलते सभी गांव के लोगों का दिन पर दिन आक्रोश बढ़ता जा रहा है क्योंकि इस बहुत बड़ी समस्या की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है
सड़क पर जलभराव के कारण गंदे पानी से दुर्गंध आ रही है। संक्रामक बीमारियों का फैलने का खतरा बना हुआ है। एक माह बीत जाने के बावजूद लोग रोड पर आज भी घुटनों तक भरे पानी में पैदल चलने को मजबूर दिख रहे हैं। सबसे बड़ी दिक्कत नौनिहाल बच्चों को स्कूल जाने के लिए हो रही है। ऑफिस जाने वालों को खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जल भराव से अनेक प्रकार की बीमारियों का खतरा भी बना रहता है। लोगों ने कहा हर साल ऐसा ही होता है। बाबू ड्राइवर के घर से सुनील यादव, अनिल यादव, मेड़ीलाल रावत, राम गुलाम रावत के घर तक घुटनों तक पानी भरा रहता है। जब कि गांवो में लगातार साफ़ सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश सचिवों को दिए गए हैं। उसके बावजूद क्षेत्र का हाल बेहाल है। वहीं मोहान रोड किनारे तालाब में जल निकासी ना होने से बरसात का पानी राष्ट्रीय राजमार्ग रोड किनारे भर रहे पानी से आवागमन में राहगीरों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। जिसकी सचिव से शिकायत करने के बावजूद उनके कान में जूं तक नहीं रेंग रहा है। सचिव क्या कोई बड़ा हादसे का इंतजार कर रहे हैं? वही सरकारी कंपोजिट स्कूल के पास रोड पर बड़े-बड़े गड्ढे में भरे गंदे पानी से होकर शिक्षा प्राप्त करने को नौनिहाल बच्चे मजबूर हैं और ग्रामीण निकलने को मजबूर हैं। जलभराव से अनेक प्रकार की बीमारियों का खतरा बना रहता है। पूरी ग्राम पंचायत में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। केवल कागजों में खानापूर्ति की जाती है। ब्लॉक में बैठे भ्रष्ट अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं। अब देखना यह होगा कि उच्च अधिकारी मामले को संज्ञान में लेते हैं या यूं ही खानापूर्ति हो जाएगी। वहीं जब इस संबंध में मामले को लेकर बीडीओ काकोरी से फोन पर वार्ता की गई तो उन्होंने बताया मामला हमारे संज्ञान में नहीं है। आपके द्वारा जानकारी मिली है, हम अभी एडीओ पंचायत से समस्या का समाधान करने का प्रयास करूंगा।




