119 जालसाज गिरफ्तार, 27 लड़कियां व 92 लड़के शामिल हैं
पुलिस को इनके पास से 103 लैपटॉप, 177 कॉलिंग मोबाइल फोन, डिजिटल उपकरण एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद
ए अहमद सौदागर लखनऊ। विभूतिखंड थाना क्षेत्र स्थित शहर की नामी-गिरामी समिट बिल्डिंग में काफी दिनों से चल रहे फर्जी कॉल सेंटर के बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए साइबर सेल और साइबर थाने की संयुक्त टीम ने 119 हाईटेक जालसाजों को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह में 27 लड़कियां व 92 लड़के शामिल हैं। खास बात यह है कि यह गोरखधंधा स्थानीय पुलिस की नाक के नीचे चल रहा था, लेकिन पुलिस को जरा भी भनक नहीं लग की।
साइबर पुलिस को इनके पास से 103 लैपटॉप, 177 कॉलिंग मोबाइल फोन के अलावा डिजिटल उपकरण एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद हुए हैं।
पुलिस कमिश्नर अमरेन्द्र कुमार सेंगर ने गुरुवार को पुलिस लाइंस स्थित गोष्ठी भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान बताया कि पकड़े गए सभी आरोपी शातिर किस्म के जालसाज हैं और इनका अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर एक संगठित गिरोह है। उन्होंने कहा कि गिरोह विशेष कर संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के बुजुर्ग नागरिकों को प्रतिष्ठित कंपनियों एवं सरकारी एजेंसियों के नाम पर ठगी का शिकार बनाते थे और GIFT,CRypocurrency एवं इंटरनेट आधारित कॉलिंग प्लेटफार्म के जरिए करोड़ों रुपयों की धोखाधड़ी करते हैं।
पुलिस कमिश्नर अमरेन्द्र कुमार सेंगर के मुताबिक इस गोरखधंधे में लिप्त ऑपरेशन मैनेजर ललित खैराजानी एवं विक्रम सिंह परमार सहित अलग-अलग राज्यों व जिलों के कुल 119 जालसाजों को पकड़ा गया है जो काफी दिनों से समिट बिल्डिंग के 11वीं मंजिल पर अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर फर्जी कॉलिंग सेंटर चलाया जा रहा था।
हाईटेक तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल कर विदेशी नागरिकों को बनाते थे निशाना
पुलिस कमिश्नर अमरेन्द्र कुमार सेंगर के निर्देशन में अपराध और अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध, अपर्णा कुमार, पुलिस उपायुक्त अपराध अनिल कुमार यादव एवं पुलिस उपायुक्त अपराध किरन यादव के नेतृत्व में सहायक पुलिस आयुक्त साइबर एवं प्रभारी साइबर सेल तथा साइबर थाने की संयुक्त टीम ने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कॉलिंग सेंटर का राजफाश किया तो पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया कि अरे इतने बड़े पैमाने पर यह गोरखधंधा चल रहा था और स्थानीय पुलिस बेखबर रही। विभूतिखंड पुलिस की लचर कार्यशैली पर फिलहाल सवाल उठना लाजिमी है कि शहर की नामी-गिरामी समिट बिल्डिंग में जालसाजी की बड़ी दुकान चल रही थी और स्थानीय पुलिस सोती रही।
तीन अलग-अलग टीमें बनाकर करते करोड़ों की ठगी
पुलिस की छानबीन में सामने आया है कि यह गिरोह सुनियोजित और तकनीकी रूप से अमेरिका के नागरिकों को निशाना बनाकर ठगी करते थे। यह लोग VoIP Calling System, Eyebeam Dialer, इंटरनेट आधारित कॉलिंग सॉफ्टवेयर एवं अन्य आधुनिक डिजिटल तकनीकी का इस्तेमाल कर अमेरिकी नागरिकों से संपर्क कर ठगी करते हैं। खुद को कंपनियों का अधिकृत प्रतिनिधि व कस्टमर सपोर्ट अधिकारी बताकर पहले हमदर्दी जताते हुए उनके बैंक खातों से रकम साफ कर चुपचाप बैठ जाते थे।
बताया जा रहा है कि यह लोग सरकारी अभिलेखों जैसा तैयार किया जाता था, जिससे पीड़ित झांसे में आकर अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई लुटा बैठते थे। यह लोग चीन चरणों में लोगों की कमाई ट्रांसफर करा लेते थे। बताया जा रहा है कि इस पकड़े गए हाईटेक जालसाजों ने पीड़ितों को डरा-धमकाकर उनके बैंक खातों को फ्रीज कर दिए जाने की बात करते हुए उनकी कमाई ऐंठ लेने की बात स्वीकार किया है। सभी आरोपित अहमदाबाद गुजरात राज्य सहित अलग-अलग राज्यों एवं जिलों के रहने वाले हैं।
हवाला के जरिए पहुंचते थे मुद्रा
रुपयों के लालच में दांव पर देश की अर्थव्यवस्था
शहर की नामी-गिरामी समिट बिल्डिंग में चल रही जालसाजी के शोरूम में बकायदा कर्मचारियों की तीस-चालीस हजार रुपए तनख्वाह के अलावा कुछ कर्मचारियों को बीमा से लेकर बोनस तक देते थे। विभूतिखंड पुलिस की नाक के नीचे चल रहा यह गोरखधंधा मानों देश की अर्थव्यवस्था को दांव पर लगा दिया। हवाला के जरिए अमेरिका से लेकर अन्य विदेशी मुल्कों से करोड़ों रुपए फर्जी कॉल सेंटर के खाते में आते हैं। इसका राजफाश हुआ तब जाकर पता चला कि यह सेंटर अबतक करोड़ की ठगी कर चुका है। यह भी बताया कि गोरखधंधा चलाने वाले हाईटेक जालसाजों ने मोटी रकम पर समिट बिल्डिंग की 11वीं मंजिल पर बने पूरे कमरे को किराए पर ले रखा था और किराए पर देने वाले मालिक को भी भनक नहीं लगी। उसे लगे भी क्यों उसे तो हर महीने मोटी रकम मिल रही थी।




