पुलिस अफसरों का दावा: महिला सुरक्षा में हुआ सुधार और बाकी घटनाओं पर लगा विराम
ए अहमद सौदागर लखनऊ । राजधानी लखनऊ में पुलिस की उपलब्धियों को लेकर खूब दावे किए जा रहे हैं। बीते सालों में प्रदेश में कानूनी व्यवस्था में कई स्तर तक सुधार हुआ है। इसी के साथ सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक और प्रभावी बनाने के लिए शुरू की गई कमिश्नरेट प्रणाली ने आज अपने सफलतम 6 साल पूरे कर लिए हैं। इस अवसर पर रिजर्व पुलिस लाइन, महानगर में भव्य समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ पुलिस आयुक्त अमरेंद्र कुमार सेंगर और कई पूर्व पुलिस कमिश्नर व वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
समारोह के दौरान कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और साइबर अपराध नियंत्रण में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 150 पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। डीजीपी ने खुद 19 पुलिसकर्मियों को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम के अंत में पारंपरिक भोज का आयोजन हुआ, जिसमें अधिकारियों से लेकर सिपाहियों तक ने एक साथ भोजन कर आपसी सामंजस्य का संदेश दिया।
13 जनवरी 2020 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथो लागू की गई इस प्रणाली के बाद लखनऊ की सुरक्षा में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं। साल 2025 में लखनऊ जनपद में डकैती की एक भी घटना दर्ज नहीं हुई, जो पुलिस की सक्रियता का सबसे बड़ा प्रमाण है। सेफ सिटी और मिशन शक्ति के प्रभावी क्रियान्वयन से महिला संबंधी अपराधों में 20 प्रतिशत की कमी आई है। प्रत्येक थाने में साइबर हेल्प डेस्क और एक समर्पित साइबर क्राइम थाने के जरिए तकनीक आधारित अपराधों पर लगाम लगाई गई है। 6 नए थानों के भवन, 700 महिला आरक्षियों के लिए हॉस्टल और आधुनिक बैरकों का निर्माण कर पुलिस कल्याण को प्राथमिकता दी गई है।




