लखनऊ। लखनऊ के गोमती नगर स्थित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में वाल्मीकि विकास सेवा संस्थान द्वारा समाज सेविका कर्मी नेत्री स्व. मुन्नी देवी वाल्मीकि की जयंती धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर संस्थान के पपोत्र राज घावरी और पपोत्री अनिका घावरी ने दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरुआत की, जो एक आस्था और श्रद्धा का प्रतीक था।
कार्यक्रम में वाल्मीकि विकास सेवा संस्थान के अध्यक्ष और चेयरमैन नरेश वाल्मीकि ने मुन्नी देवी वाल्मीकि के जीवन से प्रेरणा लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए बच्चों की शिक्षा बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर हमें बच्चों को शिक्षा देने के लिए अपने समय का बलिदान करना पड़े, तो हमें यह कदम उठाना चाहिए। इसके साथ ही, नरेश वाल्मीकि ने समाज में भाई-चारे और एकता की भावना बनाए रखने पर जोर दिया।
संस्था के सहयोगी कमल वाल्मीकि ने अपने संबोधन में कहा कि माता-पिता को अपने बच्चों के माध्यम से अपने अधूरे सपनों को पूरा करना चाहिए। उन्होंने बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता देने की बात की, ताकि आने वाली पीढ़ी एक उज्जवल भविष्य की ओर बढ़ सके।
संस्था के सचिव और प्रबंधक बाल्मीकि अंकित घावरी ने कहा कि मुन्नी देवी ने जीवनभर गरीबी का सामना किया, लेकिन समाज के लिए उनका योगदान अतुलनीय था। उन्होंने सबको प्रेरित किया कि हमें समाज सेवा में योगदान देने की दिशा में मुन्नी देवी के आदर्शों का पालन करना चाहिए।
इस मौके पर मुन्नी देवी वाल्मीकि स्मारक विद्यालय के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया, जिसने उपस्थित लोगों का दिल छू लिया। बच्चों ने अपने अभिनय और नृत्य के जरिए इस दिन को और भी खास बना दिया।
कार्यक्रम में कई गणमान्य लोग भी उपस्थित थे, जिनमें ब्रजेश चैधरी, सुनील धानुक, महेन्द्र वाल्मीकि, संजय पंडित, शैलेन्द्र घावरी, मनीष चैधरी, प्रदीप गौड़, सौरव वाल्मीकि, आशीष घावरी, सूरज वाल्मीकि, अर्जुन वाल्मीकि, सुनीता रावत, नीलू रावत, वीर सिंह, प्रविंद्र घावरी, उमेश चैधरी, नंदू चैधरी, अभिषेक चैधरी, मोती यादव, और नाबार्ड के एजीएम संजय कुमार समेत कई लोग शामिल थे। इस कार्यक्रम ने न केवल मुन्नी देवी के योगदान को याद किया, बल्कि समाज में शिक्षा और एकता के महत्व को भी उजागर किया।


