August 8, 2026 2:16 am

विशिष्ट साहित्यिक समारोह में डा. मानसी द्विवेदी “कुसुम” का काव्य संग्रह “नदी सी मैं” का  विमोचन 

लखनऊ। (संवाददाता) कवयित्री डॉ. कुसुम मानसी द्विवेदी के नवीन काव्य संग्रह “नदी सी मै” का गोमतीनगर मे आयोजित विशिष्ट साहित्यिक समारोह में भव्य विमोचन किया गया।साहित्यिक जगत की कई प्रमुख विभूतियों उपस्थित रही।

कार्यक्रम की अध्यक्षता पद्मश्री डॉ. विद्या बिंदु सिठ साहित्यकार ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सभापति विधान परिषद् उत्तर प्रदेश, कुंवर मानवेन्द्र सिंह एवं विशिष्ट अतिथि पवन सिंह चौहान ,सदस्य विधान परिषद् रहे वहीअतिथि सुरेला तिवारी, सचिव बेसिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश रहे। महेन्द्र भीषम, प्रसिद्ध उपन्यासकार एवं निबंधक, उच्च न्यायालय लखनऊ, नवल कान्त सिंहा, वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार,डॉ. पंकज तिवारी, कुशल समीक्षक एवं जिला विद्यालय निरीक्षक, अयोध्या सहित् आमंत्रित साहित्यकार डॉ पकज प्रसून, व्यंग्यकार एवं वैज्ञानिक, CDRI लखनऊ

डॉ. ओम शर्मा ओग, गीतकार एवं कुज़ल चिकित्सक कार्यक्रम को चार चांद लगाते नज़र् आये। कार्यक्रम् का अयोजन दीप-प्रज्ज्वलन एवं मां सरस्वती के चंदन-गीत से हुआ। मुख्य अतिथि कुंवर मानवेन्द्र सिंह ने काव्य संग्रह का लोकार्पण करते हुए कहा कि ‘डॉ. मानसी द्विवेदी की स्वनाएँ संवेदना, स्त्री-स्वाभिमान और जीवन के विविध रंगों को अत्यंत सहज और प्रभावपूर्ण ढंग से व्यक्त करती है। “नदी सी मै” में आज की स्त्री-अभिव्यक्ति का सशक्त दस्तावेज़ हैं।”पद्मश्री डॉ. विद्या बिंदु सिंह ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि संग्रह की भाषा-शैली, बिंव-योजना व्यवभूमि पाठक को श्रात्मानुभूति की महल यात्रा पर ले जाती हैं।

वक्ताओं ने कवयित्री की संवेदनशीलता, सामाजिक दृष्टि और गहन साहित्यिक कौशल की विशेष सराहना की। वक्ताओ ने अपने उद्धोधनों में काव्य-संग्रह की वैचारिक संरचना, संवेदात्मक विस्तार तथा समकालीन सदमों में उसकी उपयोगिता पर अपने वक्तव्य प्रस्तुत किये। डॉ. मानसी द्विवेती ‘कुसुम’ ने कहा कि “नदी की तरह डर स्त्री अपने भीतर थास, ऊर्जा, अघर्ष और सौंदर्य समेटे बहती रहती है। इस संग्रह की कविताएँ उसी यात्रा का साक्ष्य हैं।” उन्होंने पढ़ा कि-“मेरे मिजाज में मालिक के चपलता दे दी. यूँ तो सब कुछ दिख कुछ एक विफलता दे दी,मैंने देखा ही नहीं पाँव के छालों की तरफ और संघर्ष ने सौ बार सफलता दी “।

समारोह काव्य-संग्रह “नदी सी मैं” अपनी संवेदनशील सामग्री और प्रभावशाली प्रस्तुति के कारण साहित्य-जगत में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाले की ओर अग्रसर है।

कार्यक्रम का संचालन राजेश यादव द्वारा शिष्ट एवं संयोजित रूप में किया गया तथा आभार प्रदर्शन डी एन द्विवेदी, उप निदेशक ग्राम्य विकास, आजमगढ़ द्वारा प्रस्तुत किया गया।

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