न्यूज ऑफ इंडिया (एजेंसी) लखनऊ। संत कबीर, संत रविदास और गोरखनाथ की भक्ति परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से छह दिवसीय निर्गुण त्रिधारा भक्ति उत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है। यह भव्य उत्सव मंगलवार, 25 मार्च से वाराणसी में संत कबीर की जन्मस्थली लहरतारा से प्रारंभ होगा और 30 मार्च को मगहर में समाप्त होगा।
इस उत्सव का आयोजन संत कबीर अकादमी, संस्कृति विभाग द्वारा किया जा रहा है। लहरतारा में आयोजित उद्घाटन समारोह में जलज श्रीवास्तव एवं उनके मठ द्वारा निर्गुण गायन की प्रस्तुति दी जाएगी। इसके साथ ही मंदिर के स्थानीय कलाकारों एवं मऊ से आए बेचन जी द्वारा भी निर्गुण भजन प्रस्तुत किए जाएंगे।
संत कबीर ने अपने दोहों और रचनाओं के माध्यम से समाज में व्याप्त अंधविश्वास, पाखंड, जातिवाद और ढोंग का विरोध किया। उनकी विचारधारा आज भी समाज के लिए प्रासंगिक बनी हुई है। इस उत्सव में विद्यालय एवं महाविद्यालय के छात्र-छात्राएं भी संतों के विचारों को प्रदर्शित करने हेतु विशेष प्रस्तुतियां देंगे।
25 मार्च से लेकर 30 मार्च तक भक्ति उत्सव की श्रंृखला प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में चलेगी। 26 मार्च को अस्सी घाट, वाराणसी से बढ़कर 27 मार्च को महंत दिग्विजय नाथ पार्क, गोरखपुर 28 मार्च को पं0 दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय, गोरखपुर के बाद 29 व 30 मार्च को संत कबीर अकादमी प्रेक्षागृह, मगहर में जाकर समाप्त होगी।
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने अपने संदेश में बताया कि अहिंसा, सत्य और सदाचार के प्रतीक संतों की विचारधारा पर आधारित ऐसे भक्ति उत्सव समाज के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं। इससे समाज में आध्यात्मिक चेतना जागृत होगी और नई पीढ़ी को संतों के जीवन से सीखने का अवसर मिलेगा।
यह भक्ति उत्सव संत परंपरा के मूल विचारों को सहेजते हुए समाज में आपसी सद्भाव, प्रेम और एकता का संदेश देगा।




