मदर टेरेसा फाउंडेशन आश्रम पहुंच कर अनाथों का किया हौसला अफजाई
ए अहमद सौदागर लखनऊ। कहावत नहीं बल्कि हकीकत है जिसका कोई नहीं उसका खाकी वर्दी है।हजरतगंज क्षेत्र के मदर टेरेसा फाउंडेशन के आश्रम में इंस्पेक्टर हजरतगंज विक्रम सिंह टीम के साथ पहुंचे तो वहां पर मौजूद वृद्धजनों और मानसिक रूप से विक्षिप्त अनाथों के आंसुओं भरे चेहरे खिल उठे। वहीं पर पहली बार रंगों की चमक बिखरी। बताया जा रहा है कि ये वे लोग हैं, जिन्हें दुनिया ने ठुकरा दिया।परित्यक्ता आत्माएं, जिनके जीवन में त्यौहार सिर्फ एक और उदास दिन था। लेकिन थानेदार विक्रम सिंह और उनकी पुलिस टीम ने इस होली को उनके लिए जिंदगी का पहला रंगीन पल बना दिया
कल्पना कीजिए उन बेबस बुजुर्गों को, जिनकी आंखों में सालों से सन्नाटा पसरा था, जिनके हाथ कभी किसी अपने के स्पर्श से नहीं सुधरे। मानसिक रूप से टूटे अनाथ बच्चे, जो रंगों के बजाय डर और अकेलेपन से खेलते थे। पुलिसकर्मियों ने आश्रम पहुंचकर न सिर्फ रंग लगाए, बल्कि नए कपड़े पहनाए, फलों की टोकरियां थमाईं और गुजिया की मिठास खिलाई। एक बुजुर्ग ने कांपते हाथों से पुलिस वाले का हाथ थामा और फूट-फूटकर रो पड़े”साहब, आज पहली बार लगा कि कोई हमारा अपना है।” यह दृश्य दिल दहला देने वाला था।
इंस्पेक्टर विक्रम सिंह ने आश्रम में मौजूद लोगों के बीच बैठकर कहा ये रंग धुल जाएंगे, लेकिन आज का प्यार हमेशा रहेगा। आप अकेले नहीं, हम आपके परिवार हैं।
पुलिस टीम ने गीत गाए, नाचे, भोजन कराया—और वो पल आया जब एक विक्षिप्त बच्चे ने पहली बार हंसी की ठहाका लगाया। ये वो बच्चे हैं, जिन्हें परिवार ने छोड़ दिया, समाज ने कोसा, लेकिन पुलिस ने गले लगाया। यह सेवा नहीं, मानवता का चमत्कार था।
यह खबर पढ़कर आपका दिल क्यों कांप उठेगा? क्योंकि ये बताती है कि हमारे बीच कितने अनगिनत जीवन तड़प रहे हैं।भूले-बिसरे, उपेक्षित। लखनऊ पुलिस ने साबित कर दिया कि वर्दी के नीचे भी कोमल हृदय धड़कते हैं। काश, ऐसी होली हर आश्रम में मनाई जाए, हर उपेक्षित को अपनों का एहसास हो। यह कहानी आंसू और मुस्कान का मेल है, जो हर संवेदनशील दिल को छू जाएगी।




