August 8, 2026 2:13 am

हाईटेक जालसाजों ने अब रिटायर्ड इंस्पेक्टर को साइबर जालसाजों ने किया डिजिटल अरेस्ट

ढाई घंटे तक टेरर फंडिंग के नाम पर डराकर बनाना चाहा शिकार

बैंक कर्मियों की सूझबूझ से बची 80 लाख की ठगी

 

ए अहमद सौदागर लखनऊ। नगर निगम के रिटायर्ड इंस्पेक्टर को साइबर जालसाजों ने टेरर फंडिंग का डर दिखाकर करीब ढाई घंटे डिजिटल अरेस्ट रखा। जालसाजों ने खुद को डीआईजी और एटीएस पुणे का इंस्पेक्टर बताकर वीडियो कॉल किया।

पहलगाम आतंकी हमले में 40 लाख रुपए की फंडिंग करने की बात कहते हुए जेल भेजने की धमकी दी। डर की वजह से रिटायर इंस्पेक्टर अपने खातों और एफडी से करीब 80 लाख रुपए निकालने बैंक ऑफ महाराष्ट्र के गोमती नगर शाखा पहुंचे। बैंक स्टाफ की सतर्कता से वह ठगी का शिकार होने से बच गए।

एटीएस का इंस्पेक्टर बनकर कि कॉल

गोमतीनगर में बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शाखा है। बैंक के विधि अधिकारी मनीष सिंह के मुताबिक, मूलरूप से प्रतापगढ़ के रहने वाले आशियाना निवासी रिटायर इंस्पेक्टर छेदीलाल बैंक के पुराने ग्राहक हैं। सुबह उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को एंटी टेररिस्ट स्क्वायड (एटीएस), पुणे का इंस्पेक्टर रंजीत कुमार बताया।

उसने कहा कि उनके आधार कार्ड से खुले कुछ बैंक खातों से पहलगाम आतंकी हमले में 40 लाख रुपये की टेरर फंडिंग हुई है। जांच चल रही है। उन्हें डिजिटल अरेस्ट किया जा रहा है। वह किसी को भी इसकी जानकारी नहीं देंगे। छेदीलाल ने कहा कि वह बैंक पहुंच रहे हैं। बाद में बात करेंगे। इसके बाद कॉल कट गई।

थोड़ी देर बाद फिर आई वीडियो काल

छेदीलाल के फोन काटने के कुछ ही मिनट बाद जालसाजों ने वीडियो कॉल किया। इस बार कॉल पर खुद को डीआईजी एटीएस बताने वाला व्यक्ति पुलिस की वर्दी में नजर आया। उसने छेदीलाल से उनके बैंक खातों, एफडी और जमा रकम की पूरी जानकारी ली।

उसके बाद कहा कि जांच के लिए बताए जा रहे खातों में तुरंत सारी रकम ट्रांसफर करनी होगी। इसके बाद कॉल तीसरे व्यक्ति को दे दी गई। वह भी वर्दी में था और लगातार रुपये ट्रांसफर करने का दबाव बना रहा था।

बैंक पहुंचे छेदीलाल को आया पसीना

जेल जाने के डर से घबराए छेदीलाल सुबह करीब 11 बजे बैंक पहुंचे। वहां एक कोने में बैठ गए। वह खातों और एफडी से करीब 80 लाख रुपये निकालने की योजना बना रहे थे। जालसाजों ने दस मिनट बाद फिर कॉल करने की बात कही थी। इसी दौरान सर्दी के मौसम में भी उनके माथे पर पसीना देख बैंक के दफ्तरी राजकुमार को शक हुआ।

राजकुमार ने उनसे पूछताछ करने की कोशिश की, लेकिन छेदीलाल कुछ भी बताने से इनकार करते रहे। इसके बाद उसने पूरे मामले की जानकारी विधि अधिकारी मनीष सिंह को दी। मनीष सिंह छेदीलाल के पास पहुंचे। वह उनके पुराने ग्राहक थे, इसलिए पहले समझाया। कुछ देर बाद छेदीलाल ने पूरी आपबीती बता दी।

ऑनलाइन साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत

इसी बीच जालसाजों की फिर वीडियो कॉल आया। मनीष सिंह ने फोन अपने हाथ में लिया और दूसरी ओर मौजूद वर्दीधारी जालसाजों को जमकर फटकार लगाई। पुलिस अधिकारी बनकर ठगी करने की बात कहते ही जालसाजों ने फोन काट दिया। उसके बाद संपर्क नहीं किया। इसके बाद बैंक की ओर से ऑनलाइन साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

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