मलिहाबाद लखनऊ। (संवाददाता) राजधानी लखनऊ के रहीमाबाद क्षेत्र में एक गंभीर और चिंताजनक स्थिति सामने आ रही है, जहाँ कुछ कथित पत्रकार अपनी निजी स्वार्थ सिद्धि के लिए पुलिस प्रशासन पर अनुचित दबाव डालने का प्रयास कर रहे हैं। सूत्रों और विश्वसनीय जानकारी के अनुसार, यह पत्रकार चाहते हैं कि थाना प्रभारी उनके निर्देशों पर कार्य करें, और जबरन ऐसे मुकदमे दर्ज किए जाएँ जिनका कोई वास्तविक आधार नहीं है।
रहीमाबाद थाना प्रभारी ने इस संबंध में खुलकर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि, “हम किसी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज नहीं कर सकते। हमारा कर्तव्य है कि हम हर मामले की निष्पक्ष जांच करें और केवल साक्ष्यों के आधार पर ही कानूनी कार्रवाई करें।” उनका कहना है कि पुलिस प्रशासन पर इस प्रकार का दबाव बनाना, कानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ है और यह समाज में अराजकता फैलाने जैसा है। थाना प्रभारी जब ऐसे अनुचित मांगों को मानने से इनकार करते हैं, तो संबंधित कथित पत्रकार उनके विरुद्ध निराधार और भ्रामक खबरें प्रकाशित और प्रसारित करने लगते हैं। इन खबरों का उद्देश्य केवल थाना प्रभारी की छवि को धूमिल करना होता है, ताकि दबाव बनाकर अपने पक्ष में कार्य करवाया जा सके।
लोकतंत्र और पत्रकारिता पर प्रश्नचिन्ह
इस पूरे घटनाक्रम ने पत्रकारिता की साख पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है, वहीं दूसरी ओर कुछ स्वार्थी तत्व पत्रकारिता की आड़ में ऐसे कार्य कर रहे हैं, जो इस पेशे की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं।




