लखनऊ। (संवाददाता) बिजली विभाग के कर्मचारियों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। शक्ति भवन के बाहर दर्जनों कर्मचारी बीते कई दिनों से अनशन पर बैठे हैं। इनका साफ कहना है कि बिजली विभाग का निजीकरण किसी भी हाल में मंजूर नहीं है।
धरने पर बैठे कर्मचारियों ने सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि जब तक निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक नहीं लगेगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे का कहना है कि निजी हाथों में बिजली देने से उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ेगा और कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में पड़ जाएंगी।
बिजली कर्मियों के इस आंदोलन से विभागीय कामकाज पर असर पड़ रहा है। हालांकि शासन की ओर से अब तक कोई सीधी बातचीत नहीं की गई है, जिससे नाराजगी और बढ़ती जा रही है।




