August 8, 2026 3:58 am

गैर ग्रामवासी महिला के नाम अवैध रूप से पट्टा दिए जाने का आरोप, मामले की जांच की मांग

मलिहाबाद। (संवाददाता) लखनऊ राजधानी लखनऊ के तहसील मलिहाबाद क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत महदोईया में भूमि घोटाले का एक नया मामला सामने आया है। ग्रामीणों के अनुसार, तालाब की सार्वजनिक भूमि को फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर एक बाहरी महिला के नाम अवैध रूप से पट्टा कर दिया गया। यह महिला मलिहाबाद के ही गढ़ी संजर खां गाँव की निवासी बताई जा रही है, जबकि जिस ग्राम पंचायत में तालाब का पट्टा किया गया है, वह वहाँ की निवासी नहीं है। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में भी इस महिला के नाम तालाब की भूमि का पट्टा किया गया था, जिसे तत्कालीन लेखपाल की रिपोर्ट पर मलिहाबाद उपजिलाधिकारी ने निरस्त कर दिया था। इसके बावजूद मौजूदा लेखपाल निर्भय यादव पर आरोप है कि उन्होंने महिला का नाम राशन कार्ड में चढ़वाकर पुनः तालाब की भूमि पर उसका पट्टा चढ़वा दिया। ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया अवैध है और इसमें तहसील के अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका है। वहीं पूर्व लेखपाल अशोक कुमार ने तहसील प्रशासन की पोल खोलते हुए बताया कि यह सब पूर्व उप जिलाधिकारी सौरभ सिंह की मिली भगत से हुआ है, जिसकी कॉल रिकॉर्डिंग पत्रकार के मोबाइल में साक्ष्य के रूप में सुरक्षित है।

 

मौजूदा ग्राम प्रधान नीलम यादव और प्रधानपति राजेश यादव ने बताया कि मौके पर जाकर उन्होंने जबरन हो रहे कब्जे को फिलहाल रुकवा दिया है। उन्होंने कहा कि संबंधित महिला को वैकल्पिक भूमि देने की बात की गई है। लेकिन विवाद तब और गहरा गया जब ग्रामीणों ने बताया कि जो वैकल्पिक भूमि दी जा रही है, वह कब्रिस्तान की है, जिसमें कई पुरानी कब्रें मौजूद हैं। इस बात से ग्रामीणों में गहरी नाराज़गी है कि सार्वजनिक हित की भूमि के बदले धार्मिक स्थल की भूमि दी जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि लेखपाल और कुछ उच्चाधिकारियों ने इस मामले में आर्थिक लाभ लिया है, जिस कारण इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि अगर तालाब पर निर्माण कार्य जारी रहा तो आसपास की सैकड़ों बीघा खेती प्रभावित होगी और सिंचाई के अभाव में खेती पूरी तरह ठप हो जाएगी। इसका सीधा असर उनकी आजीविका पर पड़ेगा और उनके परिवार भूखमरी की कगार पर पहुँच सकते हैं।ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो वे धरना प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।

तहसील प्रशासन पर उठते बड़े सवाल

यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जब संबंधित महिला महदोईया पंचायत की निवासी ही नहीं है, तो उसके नाम पट्टा कैसे हुआ? क्या यह जानबूझकर किया गया षड्यंत्र है? और यदि पहले यह पट्टा निरस्त किया जा चुका था, तो दोबारा इसे कैसे वैधता दी गई? ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

 उप जिलाधिकारी ने इस मामले में क्या बताया

इस संबंध में उप जिलाधिकारी मलिहाबाद से फोन पर सम्पर्क कर जानकारी मांगने का प्रयास किया गया तो उन्होंने बताया कि अगर पट्टा निरस्त हुआ है तो उसके साक्ष्य मुझे उपलब्ध करवाइए।

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