August 8, 2026 3:57 am

विश्वविद्यालय के निर्णय के विरुद्ध लुआक्टा ने दिया धरना

लखनऊ। एकेडमिक काउंसिल तथा स्नातक स्तर के शिक्षकों को शोध अधिकार से वंचित किये के विश्वविद्यालय के निर्णय के विरुद्ध लुआक्टा द्वारा आंदोलन किया गया एवं विश्वविद्यालय मे धरना दिया गया।

इस संबंध में माननीय कुलपति महोदया से दो बार वार्ता हुई, लेकिन वार्ता विफल रही, जिसके कारण लुआक्टा द्वारा आंदोलन को आगे जारी रखने का निर्णय लिया गया l इस संबंध में लुआक्टा कार्यकारणी की यथा शीघ्र बैठक बुलाई जायेगी, एवं आंदोलन की रूप रेखा तय की जायेगी, आंदोलन मे धरना प्रदर्शन, जेल भरो आंदोलन, तथा यदि आवश्यक हुआ तो आगामी परीक्षाओं का बहिष्कार, सभी जन प्रतिनिधियो को भी लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा किये जा रहे मनमाने निर्णय से अवगत कराया जायेगा, तथा यह भी अवगत कराया जायेगा कि विश्वविद्यालय किस प्रकार छात्रों का अहित कर रहा है, यहाँ यह अवगत कराना समीचीन है कि महाविद्यालयो के शिक्षकों के शोध कराने के कारण लखनऊ विश्वविद्यालय में शोध छात्रों को प्रवेश आसानी से मिल जाता था, एवं जे आर एफ एवं नेट पास विधार्थियो को कही भटकना नही पड़ता है, साथ ही साथ जब महाविद्यालय के शिक्षकों को शोध अधिकार मिला है तब सारे जे आर एफ विधार्थियो का प्रवेश नही हो पा रहा है। अवगत कराना है कि आज के एकेडमिक काउंसिल की बैठक के एजेंडे में पी एच डी अध्यादेश 2025 को पारित कराने के प्रस्तुत किया जा रहा था, तथा पुन: महाविद्यालय के स्नातक स्तर के शिक्षकों को शोध अधिकार से बंचित किये जाने का प्रयास किया जा रहा था।

संगठन द्वारा विश्वविद्यालय प्रशासन के इस भी निर्णय का विरोध किया जा रहा था और यह तय किया गया था मा कुलपति महोदया से इस विषय पर वार्ता किया जायेगा और अवगत कराया जायेगा कि राज्य सरकार द्वारा स्नातक स्तर के शिक्षकों को शोध का अधिकार दिया गया है और विगत वर्ष भी यू जी सी रेगुलेशन 2022 की अधिसूचना निर्गत होने के बाबजूद स्नातक स्तर पर शोध के लिए शिक्षकों को यह अधिकार प्राप्त है, इस सत्र मे भी प्रवेश किया जा रहा है तो आगे यू जी शिक्षकों के शोध कराने मे विश्वविद्यालय को क्यो आपत्ति है, इसे एकेडमिक काउंसिल मे प्रस्तुत किया न किया जाय, और जब पूरे प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयो मे स्नातक स्तर के शिक्षक शोध करा रहे हैं तो लखनऊ विश्वविद्यालय महाविद्यालयो के शिक्षकों के साथ ऐसा सौतेला व्यवहार क्यो कर रहा है।

आंदोलन के बाद शिक्षकों को पुन: वार्ता हेतु बुलाया गया, लुआक्टा द्वारा पुन: एकेडमिक काउंसिल की बैठक बुलाकर पुनर्विचार का आग्रह किया गया, जिसे कुलपति महोदया द्वारा स्वीकार नहीं किया गया एवं वार्ता विफल हो गयी, लुआक्टा द्वारा विश्वविद्यालय प्रशासन को आंदोलन के निर्णय से अवगत करा दिया गया। लुआक्टा पूर्व कुलपतियो के निर्णय न को वर्तमान कार्यवाहक कुलपति द्वारा पलटने के निर्णय की निंदा करता है, ऐसा प्रतीत होता है कि पिछले सारे कुलपति अज्ञानी थे, आज का आंदोलन कल के संगठन के निर्णय के आधार पर किया गया है।

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