लखनऊ। लखनऊ के ताज होटल में रविवार को नियोगी बुक्स द्वारा आयोजित भव्य कार्यक्रम में वरिष्ठ वास्तुकार सविता अग्रवाल की नई पुस्तक “मुरालेज: आर्किटेक्चरल स्पेशियल नैरेटिव” का लोकार्पण हुआ। यह पुस्तक 11 अगस्त 2025 को प्रकाशित होगी और इसमें मुरालेज वास्तुकला फर्म के पाँच दशकों की रचनात्मक यात्रा दर्ज है।
मुरालेज, भारत के निर्मित वातावरण में परंपरा और आधुनिकता के अद्भुत संगम के लिए जानी जाती है। इस मोनोग्राफ में 275 से अधिक फोटोग्राफ और 161 चित्रण शामिल हैं, जो भारतीय वास्तुकला में समय के साथ आए बदलावों को दिखाते हैं—जहाँ सजीले, भव्य ढाँचों से लेकर आधुनिक, न्यूनतमवादी और सतत डिज़ाइन तक का सफर दर्ज है। इसमें सार्वजनिक अवसंरचना, आवासीय परिसरों, वाणिज्यिक इंटीरियर डिज़ाइन और विरासत परियोजनाओं तक के उदाहरण दिए गए हैं।
सविता अग्रवाल ने विमोचन के दौरान कहा कि “वास्तुकला केवल इमारतें खड़ी करना नहीं है, बल्कि ऐसे स्थान रचना है जो लोगों, समय और परिवेश की प्रतिक्रिया में जन्म लेते हैं। मुरालेज हमारी विकास यात्रा की कहानी है, जहाँ भारतीय मूल्यों में जड़ें रखते हुए समकालीन दृष्टिकोण अपनाया गया है।”
पाँच दशकों से मुरालेज का नेतृत्व कर रहीं अग्रवाल को वास्तुकला शिक्षा में योगदान और डिज़ाइन में उत्कृष्टता के लिए कई सम्मान मिले हैं, जिनमें लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड (इंस्टिट्यूट ऑफ़ ओरिएंटल हेरिटेज, 2015) और लखनऊ आर्किटेक्ट्स एसोसिएशन अवॉर्ड (2022) शामिल हैं। उन्होंने देशभर के अनेक युवा वास्तुकारों को मार्गदर्शन भी दिया है।
नियोगी बुक्स की सीओओ त्रिशा नियोगी ने कहा कि “यह पुस्तक भारतीय वास्तुकला के बदलते स्वरूप की सशक्त गवाही है। हम चाहते हैं कि यह विरासत और नवाचार के मेल को नई पीढ़ियों तक पहुँचाए।”
पुस्तक न केवल मुरालेज की रचनात्मकता का दस्तावेज है, बल्कि शहरी भारत के बदलते चेहरे का भी जीवंत चित्रण करती है—जहाँ रूप और कार्य एक साथ चलते हैं, और हर परियोजना एक नई कहानी कहती है।




