यातायात नियमों की खुलेआम उड़ रहीं धज्जियां, खानापूर्ति कर संबंधित विभाग साधा चुप्पी
ए अहमद सौदागर लखनऊ। राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था में बड़ी समस्याएं खड़ी करने वाले नाबालिग ई-रिक्शा चालक पुलिस की नाक के नीचे दौड़ा रहे हैं। इसके लिए पुलिस के आलाधिकारियों ने कई बार अभियान चलाया, लेकिन कड़वा सच यह है कि दो-चार कदम चलने के बाद पूरी कवायद ठंडे बस्ते में चली गई।
गौर करें तो वर्ष 23 में लखनऊ जिला अधिकारी ने सड़क पर बेखौफ होकर ई-रिक्शा दौड़ाने वाले नाबालिग चालकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का फरमान जारी किया था, लेकिन आजतक कोई मुकदमा दर्ज करवाने वाला ही नहीं मिला। नतीजतन आज भी नाबालिग ई-रिक्शा चालक ई-रिक्शा बेधड़क होकर चला रहे हैं।
नाबालिग बच्चे ई-रिक्शा सड़क पर दौड़ा रहे, लेकिन कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग अपने कदम आगे नहीं बढ़ा रहे हैं।
सनद रहे कि यातायात व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए लिए और सड़क पर बेधड़क होकर दौड़ा रहे नाबालिग ई-रिक्शा चालकों पर कार्रवाई के लिए तत्कालीन डीएम सूर्यपाल गंगवार ने फरमान जारी किया था और दावा भी किया था कि जिले में कोई भी नाबालिग ई-रिक्शा चलाता पाया गया तो उसके व उसके पिता के खिलाफ संबंधित थाने में मुकदमा दर्ज किया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी पुलिस, आरटीओ व जिला प्रशासन को सौंपी गई थी।
लेकिन जैसे ही तत्कालीन जिलाधिकारी का तबादला हुआ मानो पूरी कवायद भी उन्हीं के साथ चली गई। नतीजतन आज भी सड़क पर ई-रिक्शा सड़क पर दौड़ाते हुए नाबालिग देखे जा सकते हैं।
वहीं पुलिस कमिश्नर अमरेन्द्र कुमार सेंगर ने सड़क जाम जाम लगाने वालों के खिलाफ अभियान चलाने का निर्देश दिए, लेकिन आज भी प्रमुख बाजारों चौराहों पर यातायात व्यवस्था को बाधित करने वाले ई-रिक्शा चालकों का बोलबाला है।




