August 8, 2026 3:00 am

मलिहाबाद: कुदरत का कहर, आंधी-बारिश से किसानों और बागवानों की कमर टूटी

“यही फसल हमारा एकमात्र सहारा थी। बच्चों की पढ़ाई, शादी-ब्याह और कर्ज की अदायगी सब इसी पर टिकी थी। अब कुदरत की इस मार के बाद भविष्य धुंधला नजर आ रहा है।”— हताश किसान और बागवान

मलिहाबाद, लखनऊ। (संवाददाता) राजधानी लखनऊ समेत मलिहाबाद क्षेत्र में मंगलवार की रात मौसम के बदले मिजाज ने भारी तबाही मचाई है। रात भर गरज-चमक के साथ हुई तेज बारिश और भीषण आंधी ने जहां जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया, वहीं क्षेत्र के मुख्य आधार—किसानी और बागवानी—को गहरा जख्म दिया है।

मलिहाबाद की विश्वप्रसिद्ध ‘दशहरी’ और अन्य आम की फसलों पर मौसम की मार सबसे ज्यादा पड़ी है। पेड़ों पर टिक रहे छोटे-छोटे आम आंधी के कारण जमीन पर बिछ गए हैं। कई जगहों पर पेड़ों की टहनियां टूट गई हैं, जिससे बागवानों को इस सीजन में बड़े घाटे की आशंका है। खेतों में कटी रखी गेहूं की फसल तेज हवाओं में उड़ गई और बारिश में भीगने से खराब हो गई है। सरसों की मड़ाई का कार्य भी पूरी तरह ठप हो गया है।

बागवान इस समय पेड़ों में फैल रहे रोगों को रोकने के लिए धुलाई और कीटनाशकों के छिड़काव में जुटे थे, लेकिन इस बारिश ने सारा कार्य शून्य कर दिया है। रात भर आसमानी बिजली और आंधी के कारण विद्युत सप्लाई पूरी तरह चरमरा गई। क्षेत्र के घर रात भर अंधेरे में डूबे रहे। हालांकि, विभाग के कर्मचारियों की कड़ी मशक्कत के बाद बुधवार दोपहर बाद आपूर्ति बहाल हो सकी।

किसानों और बागवानों के माथे पर चिंता साफ देखी जा सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसी फसल से साल भर के त्योहार और घरेलू खर्च चलते थे। अब इस बड़े नुकसान के बाद सरकार और प्रशासन से मुआवजे की उम्मीद ही अंतिम सहारा बची है।

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