लखनऊ। (संवाददाता) एक तरफ जहाँ भारत 5G तकनीक के साथ डिजिटल क्रांति की नई ऊँचाइयों को छू रहा है, वहीं राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद ब्लॉक स्थित ‘नई बस्ती’ के ग्रामीण आज भी बुनियादी मोबाइल नेटवर्क की समस्या से जूझ रहे हैं। मोबाइल सिग्नल न मिलने के कारण गाँव का बाहरी दुनिया से संपर्क लगभग कट चुका है, जिससे यहाँ का जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है।
नेटवर्क की अनुपलब्धता ने गाँव के विकास के पहियों को थाम दिया है, जिसके गंभीर परिणाम सामने आ रहे हैं ऑनलाइन पढ़ाई और डिजिटल युग में स्कूली बच्चों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। इंटरनेट न होने से वे पिछड़ रहे हैं।
आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस बुलाना या डॉक्टर से संपर्क साधना एक बड़ी चुनौती है। सही समय पर संचार न हो पाने से ग्रामीणों की जान पर बन आती है।ठप कैशलेस इंडिया के दौर में यहाँ के निवासी ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई भुगतान और सरकारी योजनाओं के डिजिटल लाभ लेने से वंचित हैं।
“छत और पेड़ों का सहारा” ही एकमात्र विकल्प
गाँव के निवासी रामनरेश, रामचंद्र, बब्लू, अजीत सिंह शर्मा और किसान नेता रोहित कुमार कनौजिया का कहना है कि उन्हें एक जरूरी कॉल करने के लिए भी मीलों दूर मुख्य सड़क या ऊँचे स्थानों पर जाना पड़ता है। ग्रामीणों का दर्द छलकते हुए कहना है, “इस डिजिटल युग में हम खुद को दूसरे ग्रह के वासी जैसा महसूस कर रहे हैं, जहाँ हमारी दिनचर्या ही रुक गई है।”
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी इस समस्या को लेकर कई बार जियो, एयरटेल और वोडाफोन जैसी बड़ी टेलीकॉम कंपनियों के साथ-साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी पत्र लिखे हैं। बार-बार मिलने वाले केवल खोखले आश्वासनों से अब ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गाँव में मोबाइल टावर नहीं लगाया गया और नेटवर्क की समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे अपनी मांगों के समर्थन में सड़क पर उतरकर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।




