लखनऊ। (संवाददाता) भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) उत्तरी क्षेत्र ने 30 अप्रैल से 1 मई 2026 तक रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), रक्षा मंत्रालय, लखनऊ में “एम्पावरिंग इंडिजेनाइजेशन: वेंडर डेवलपमेंट, एग्ज़िबिशन एवं बी2बी मीटिंग्स” विषय पर CII इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉन्क्लेव – 2026 का सफलतापूर्वक आयोजन किया। यह कॉन्क्लेव स्वदेशीकरण को आगे बढ़ाने, वेंडर पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने तथा रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में उद्योगगत सहभागिता को प्रोत्साहित करने के लिए एक केंद्रित मंच के रूप में आयोजित किया गया।
भारत के रक्षा विनिर्माण और निर्यात केंद्र बनने की दिशा में प्रगति पर प्रकाश डालते हुए पुनीत करुरा चेयरपर्सन, CII नॉर्दर्न रीजन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO, सैमटेल एवियोनिक्स ने कहा कि “भारत दुनिया के सबसे बड़े रक्षा आयातकों में से एक होने से आगे बढ़कर एक मजबूत विनिर्माण और निर्यात केंद्र बनने की ओर अग्रसर है। सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियों की शुरुआत, घरेलू खरीद को बढ़ावा और निजी क्षेत्र व स्टार्टअप्स की बढ़ती भागीदारी इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। रक्षा निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है, जो भारतीय क्षमताओं पर वैश्विक विश्वास को दर्शाती है।
उन्होंने आगे कहा कि इस गति को बनाए रखने के लिए नवाचार, अनुसंधान एवं विकास (R&D) और तकनीकी विकास पर निरंतर ध्यान देना आवश्यक होगा, जिससे भारतीय कंपनियां वैश्विक स्तर पर उन्नत रक्षा प्रणालियों और समाधान विकसित कर सकें, मूल्य श्रृंखला में ऊपर बढ़ें और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रभावी रूप से प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनें।”
शोध और विनिर्माण के बीच सहयोग की आवश्यकता पर जोर देते हुए Alok Dixit, एसोसिएट डायरेक्टर, डिफेंस मैटेरियल्स एंड स्टोर्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट, कानपुर ने कहा,
“DRDO, CII और उद्योग के बीच सहयोग अगली पीढ़ी की रक्षा क्षमताओं के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक है। आज की जटिल चुनौतियों का सामना कोई एक संस्था अकेले नहीं कर सकती। मिलकर काम करने से नवाचार तेज होगा और स्थानीय विनिर्माण मजबूत होगा, जिससे आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य साकार होगा।”
उन्होंने Technology Development Fund (TDF) योजना की भूमिका को भी रेखांकित किया, जो उद्योग और स्टार्टअप्स को रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास के लिए एक मजबूत मंच प्रदान करती है।
यह कॉन्क्लेव उद्योग और रक्षा क्षेत्र के बीच लक्षित संवाद को सक्षम बनाने में सफल रहा, जिससे आपूर्तिकर्ताओं को बदलती खरीद आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी क्षमताओं को संरेखित करने और सहयोग के अवसरों का अन्वेषण करने का अवसर मिला। संरचित संवाद, तकनीकी प्रदर्शनों और केंद्रित चर्चाओं ने आपूर्ति श्रृंखला एकीकरण को सुदृढ़ करने और रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में स्वदेशीकरण को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।




