क्रॉनिक पेन के लिए अब दवाओं के बजाय मिनिमली इनवेसिव तकनीकों पर ज़ोर
लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (Dr. RMLIMS), लखनऊ के पेन मेडिसिन यूनिट द्वारा “एडवांसेज़ इन पेन मेडिसिन” विषय पर एक दिवसीय सी.एम.ई. (निरंतर चिकित्सा शिक्षा) कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इंडियन सोसाइटी फॉर स्टडी ऑफ पेन (ISSP) के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर के विशेषज्ञों ने शिरकत की।
मुख्य आकर्षण एवं वैज्ञानिक चर्चा
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि क्रॉनिक पेन (दीर्घकालिक दर्द) अब एक प्रमुख नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज (NCD) बन चुका है, जिससे लगभग 20% वयस्क प्रभावित हैं। आधुनिक तकनीकें: चर्चा का मुख्य केंद्र MIPSI (मिनिमली इनवेसिव पेन एंड स्पाइन इंटरवेंशंस) रहा। स्पाइनल कॉर्ड स्टिमुलेशन जैसी तकनीकों को फेल्ड बैक सर्जरी सिंड्रोम के लिए रामबाण बताया गया।
ऑस्टियोपोरोसिस और कैंसर जनित फ्रैक्चर के लिए वर्टिब्रोप्लास्टी एवं बैलून काइफोप्लास्टी को प्रभावी समाधान बताया गया, जिससे मरीज को त्वरित राहत मिलती है। रेडियोफ्रीक्वेंसी, स्पाइन एंडोस्कोपी और इंट्राथीकल पंप जैसी तकनीकों से दवाओं पर निर्भरता कम करने पर जोर दिया गया।
संस्थान की उपलब्धियां और भविष्य की योजनाएं
संस्थान के निदेशक प्रो. सी. एम. सिंह के संरक्षण में आयोजित इस कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं। आयोजन सचिव प्रो. शिवानी रस्तोगी ने बताया कि लोहिया संस्थान में देश की सबसे उन्नत ‘MIPSI Lab’ उपलब्ध है।
नया प्रशिक्षण पाठ्यक्रम: इस वर्ष से संस्थान में FNB (फेलो ऑफ नेशनल बोर्ड) की दो सीटों पर प्रशिक्षण शुरू होगा। उत्तर भारत के सरकारी संस्थानों में यह एक अग्रणी पहल है। DM कोर्स की तैयारी: विभागाध्यक्ष प्रो. पी. के. दास ने जानकारी दी कि संस्थान ने पेन मेडिसिन में डीएम (DM) कोर्स शुरू करने हेतु आवेदन किया है।
कार्यक्रम में आम जनमानस के लिए “अपना पेन फिजिशियन ढूंढें” मुहिम के तहत बताया गया कि मरीज www.issp-pain.org पर जाकर अपने शहर के विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. मेजर पंकज सुरंगे (डीन, इंडियन अकादमी ऑफ पेन मेडिसिन) उपस्थित रहे। साथ ही प्रो. प्रद्युमन सिंह (डीन), प्रो. विक्रम सिंह (CMS), और प्रो. सुब्रत चंद्र (रजिस्ट्रार) ने गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। राष्ट्रीय फैकल्टी के रूप में डॉ. सिद्धार्थ वर्मा और डॉ. संजोग माकेवर ने अपने अनुभव साझा किए।




