तिमाही रिपोर्ट न देने पर 10 हजार रुपये जुर्माना
लखनऊ। न्यूज ऑफ इंडिया (एजेंसी) लखनऊ। उत्तर प्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी-रेरा) ने रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। प्राधिकरण ने उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (जनरल) रेगुलेशन, 2019 के 11वें संशोधन को अधिसूचित करते हुए पंजीकृत रियल एस्टेट एजेंटों के लिए कारोबार से जुड़े रिकॉर्ड रखना और प्रत्येक तिमाही में लेन-देन की रिपोर्ट देना अनिवार्य कर दिया है।
नए नियमों के अनुसार सभी पंजीकृत रियल एस्टेट एजेंटों को तिमाही समाप्त होने के 15 दिनों के भीतर अपने द्वारा कराए गए लेन-देन और एजेंसी से जुड़े कर्मचारियों का विवरण यूपी रेरा की वेबसाइट पर अपलोड करना होगा। निर्धारित समय सीमा के भीतर रिपोर्ट जमा न करने पर संबंधित तिमाही के लिए 10,000 रुपये का विलंब शुल्क देना होगा।
यूपी रेरा के अनुसार अब एजेंटों को ग्राहकों से जुड़े सभी लेन-देन का रिकॉर्ड निर्धारित प्रारूप में सुरक्षित रखना होगा। इसके तहत कैश बुक, जर्नल, लेजर और ग्राहक रजिस्टर बनाए रखना अनिवार्य किया गया है। इन अभिलेखों को परियोजना पूर्ण होने अथवा बिक्री एवं लीज डीड के पंजीकरण की तारीख से कम से कम पांच वर्षों तक सुरक्षित रखना होगा।
प्राधिकरण ने रेगुलेशन-54 का नाम बदलकर “द रियल एस्टेट एजेंट एनरोलमेंट, ट्रेनिंग, सर्टिफिकेशन एंड स्टैच्यूटरी कंप्लायंसेज” कर दिया है। जांच या किसी नियामकीय कार्यवाही की स्थिति में एजेंटों को ये दस्तावेज प्राधिकरण अथवा अधिकृत अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे।
यूपी रेरा का कहना है कि इन प्रावधानों से संपत्ति लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ेगी, एजेंटों की जवाबदेही तय होगी और ग्राहकों को अधिक सुरक्षा मिलेगी। साथ ही रियल एस्टेट बाजार में होने वाले लेन-देन की प्रभावी निगरानी भी संभव हो सकेगी।
संशोधन के तहत पहली बार रिपोर्ट दाखिल करते समय एजेंटों को यूपी रेरा में पंजीकरण प्राप्त करने की तिथि से अब तक किए गए सभी लेन-देन का विवरण देना होगा। इसके बाद प्रत्येक तिमाही की अलग-अलग रिपोर्ट जमा करनी होगी।
यूपी रेरा के चेयरमैन Sanjay R. Bhoosreddy ने कहा कि नए प्रावधान रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यावसायिकता को मजबूत करेंगे। उन्होंने कहा कि रियल एस्टेट एजेंट घर खरीदारों और बिल्डरों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं, इसलिए उनके द्वारा सही रिकॉर्ड रखना और समय पर जानकारी उपलब्ध कराना बाजार में भरोसा कायम करने के लिए आवश्यक है।




