मोहनलालगंज में मौत का सन्नाटा: 48 घंटे में राजधानी की दो तस्वीरें
ए अहमद सौदागर लखनऊ। राजधानी में आग का सिलसिला थम नहीं रहा। अलीगंज ने 15 बच्चों की सांसें छीनीं, ठाकुरगंज के इरम डिग्री कॉलेज का कमरा राख हुआ… और अब आग की लपटें गाजीपुर तक पहुंच गईं। हलांकि यहां भगवान का शुक्र है बड़ा नुकसान टल गया, पर हर नई आग लखनऊ के जमीर को झकझोर रही है। उधर मोहनलालगंज में एक 20 साल के लड़के ने खेत के हाईटेंशन खंभे से फांसी लगाकर जिंदगी खत्म कर ली। 48 घंटे… एक तरफ आग, दूसरी तरफ मौत।
गाजीपुर में ट्रांसफार्मर के पास धधकी आग… बिजली कटवाकर टल गई बड़ी त्रासदी
रात 23/24 जून की दरमियानी रात डायल-112 की घंटी बजी – “चौकी सर्वोदय नगर, कन्वेंशन सेंटर के पास बिजली के खंभे में आग, साथ खड़ी नगर निगम की कूड़ा गाड़ी भी चपेट में।”
सूचना मिलते ही थाना गाजीपुर पुलिस दौड़ी। खंभा, ट्रांसफार्मर, ऊपर लटके तार… जरा सी चूक और ब्लास्ट हो जाता। पुलिस ने फौरन बिजली विभाग को फोन किया और तुरंत विद्युत आपूर्ति बंद कराई। फिर फायर ब्रिगेड पहुंची। दमकल कर्मियों ने लपटों को दबोचा और आग बुझा दी। नगर निगम की कूड़ा गाड़ी को सुरक्षित जगह खिसकाया गया। आसपास का इलाका खाली कराया गया।
नगर निगम जोन-7, वार्ड एलबीएस प्रथम के गार्ड सूर्य प्रकाश शुक्ला समेत स्थानीय लोग मौके पर मौजूद रहे। पुलिस ने राहत-बचाव और सुरक्षा के इंतजाम संभाले।
नतीजा: कोई जनहानि नहीं, स्थिति नियंत्रण में
पर सवाल खड़ा है – अलीगंज में शॉर्ट सर्किट, ठाकुरगंज में एसी की चिंगारी… अब गाजीपुर में खंभे-ट्रांसफार्मर के पास आग। क्या राजधानी की बिजली की वायरिंग भी सांस ले रही है?
मोहनलालगंज: 20 साल का अंकुश फांसी पर झूल गया… हाईटेंशन खंभे से लटका मिला शव
24 जून सुबह 6 बजे चौकी प्रभारी सीसेंडी को सूचना मिली – ग्राम मनोहरापुर में एक युवक ने फांसी लगा ली। पुलिस जब खेत पहुंची तो नजारा रूह कंपा देने वाला था। अंकुश पुत्र स्व. लालता प्रसाद, उम्र 20 वर्ष हाईटेंशन लाइन के खंभे से दुपट्टे/रस्सी के सहारे लटका हुआ था।
पुलिस ने शव उतारकर कब्जे में लिया। पंचायतनामा की कार्रवाई शुरू हुई। पोस्टमार्टम के लिए शव भेजा गया। फॉरेंसिक टीम ने खंभे, आसपास के निशान और हर सबूत जुटाए।
प्रथम दृष्टया आत्महत्या, पर पुलिस “प्रथम दृष्टया” पर रुक नहीं रही। मृत्यु के असली कारण, मानसिक तनाव, पारिवारिक वजह… हर एंगल खंगाला जा रहा है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और साक्ष्यों के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।
48 घंटे का हिसाब
अलीगंज में 15 लाशें। ठाकुरगंज: राख हुआ कमरा। गाजीपुर: बुझी हुई लपटें, पर दहशत वही। मोहनलालगंज: 20 साल की जिंदगी का सन्नाटा।एक तरफ सिस्टम फेल हो रहा है – फायर एनओसी नहीं, बिजली के खंभे असुरक्षित। दूसरी तरफ इंसान टूट रहा है – 20 साल का अंकुश, जिसके पास जिंदगी थी पर जीने की वजह नहीं बची।
लखनऊ की फायर ब्रिगेड आग बुझा रही है। पुलिस एफआईआर लिख रही है। पर राजधानी को अब आग और अवसाद दोनों से लड़ना है। वरना अगली सुबह फिर किसी खंभे से धुआं उठेगा… या किसी खेत में कोई और अंकुश लटका मिलेगा।




