August 8, 2026 2:55 am

जरायम का नया अर्थशास्त्र फर्जी काल सेंटर का गोरखधंधा 

जरायम का नया अर्थशास्त्र फर्जी काल सेंटर का गोरखधंधा 

खेल में खेल: कमजोर कानून बना हाईटेक जालसाजों का हथियार 

कम जोखिम और करोड़ों के वारे-न्यारे 

मेहनत नहीं धोखाधड़ी रास आ रहा साइबर अपराधियों को 

 

ए अहमद सौदागर लखनऊ। मादक पदार्थ, हत्या, अपहरण और रंगदारी। अपराध की दुनिया का अर्थशास्त्र कभी इन शब्दों के आसपास था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। बदलते वक्त का दस्तूर कहें या फिर कम जोखिम में करोड़ों कमाने की चाहत कभी बुलेट के पीछे भागने वाले बदमाशों की खेप फर्जी काल सेंटर चलाने में अपनी जड़ें जमा रहीं हैं।

विभूतिखंड क्षेत्र स्थित शहर की नामी-गिरामी समिट बिल्डिंग के 11वीं मंजिल पर संचालित काल सेंटर चलाने वाले 119 हाईटेक जालसाजों के पकड़े जाने के बाद इस बात की तस्दीक हो जाती है कि पुलिस के तमाम कोशिशों के बावजूद राजधानी लखनऊ सहित यूपी के अलग-अलग जिलों में इनकी जडें काफी गहरी हैं। 119 लोगों की गिरफ्तारियों से पुलिस भले ही अपनी पीठ ठोंक ले, लेकिन हकीकत है कि करोड़ों के इस खेल की बड़ी मछलियों का शिकार करना अभी दूर की कौड़ी है और तमाम पढ़ा-लिखा युवा इस गोरखधंधे में अपनी जड़ें तलाश रहे हैं।

चर्चित समिट बिल्डिंग की 11वीं मंजिल से बुधवार को साइबर सेल और साइबर थाने की संयुक्त टीम ने 119 हाईटेक जालसाजों को दबोचा तो पता चला कि सिर्फ पढ़े-लिखे युवक नहीं बल्कि युवतियां भी शामिल थीं। इनके पास से भारी मात्रा में लैपटॉप, मोबाइल फोन व फर्जी काल सेंटर चलाने के उपकरण बरामद हुए थे। इससे साफ है कि इनका नेटवर्क शहर और देश तक नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में फैला है।

खास बात यह है कि साइबर सेल और साइबर थाने की संयुक्त टीम ने इनसे पूछताछ शुरू की तो पता चला कि इस गिरोह में शामिल आठवीं कक्षा से लेकर बीकाम व बीटेक पास युवा ही पूरे गोरखधंधे को चला रहे थे।

प्रेस वार्ता के दौरान पुलिस कमिश्नर अमरेन्द्र कुमार सेंगर ने बताया कि इस गिरोह को अंजाम देने वाले 119 आरोपियों में कक्षा आठवीं से लेकर बीए बीकॉम, बीएससी, एलएलबी व बीटेक पास युवा ही अपराध के दलदल में कदम रखकर इस गोरखधंधे को बेखौफ होकर चला रहे थे।

खास बात यह है कि यह अवैध गोरखधंधा समिट बिल्डिंग की 11वीं मंजिल पर करीब सात-आठ महीने से चल रहा था, लेकिन विभूतिखंड पुलिस को इसकी जरा भी भनक नहीं लग सकी थी। इससे साफ है कि यहां के जिम्मेदार स्टेशन अफसर अपराध और अपराधियों को पकड़ने में नाकाम साबित हो रहे हैं।

यह फर्जी काल सेंटर लोकल स्तर पर नहीं बल्कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर चल रहा था। इस गिरोह में शामिल आरोपी ललित खैराजानी व विक्रम सिंह का नेटवर्क देश तक नहीं बल्कि अमेरिका तक फैलकर वहां के नागरिकों को निशाना बनाते थे।

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