आरोपी ने पानी बताशा बेचने वाले काफी दिनों से कर रहा था परेशान
उसकी प्रताड़ना और रोज-रोज के तगादे से तंग आकर आकर लगाया था मौत को गले
परिजनों के प्रदर्शन के बाद दबंग सूदखोर के खिलाफ पुलिस ने दर्ज की थी रिपोर्ट
ए अहमद सौदागर लखनऊ। राजधानी में सूदखोरों का जाल कदम-कदम फैला हुआ है। सूदखोरों के चंगुल में फंसकर पानी बताशा बेचकर अपने परिवार का जीवन यापन करने वाले फतेहगंज गल्ला मंडी निवासी अजय गुप्ता इस कदर आहत हुआ कि उसे जान देकर कर्ज चुकानी पड़ी। दुकान लगाने के एवज में प्रतिदिन ऋषभ पांच सौ रुपए वसूलता था फिर उसका पेट नहीं भरा और छोटी सी दुकान लगाकर दो जून की रोटी का जुगाड़ करने वाले इस कदर धमकाया कि वह खुदकुशी करने के लिए मजबूर हो गया। काफी जद्दोजहद के बाद नाका पुलिस ने मृतक की पत्नी अनीता की तहरीर पर मुकदमा दर्ज अमीनाबाद क्षेत्र के 163/259 मौलवी गंज चमड़ा मंडी खटीकाना निवासी शैवी सोनकर उर्फ ऋषभ सोनकर पुत्र मनोज सोनकर को शनिवार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का दावा है कि इस गोरखधंधे से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीमें उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।
बताते चलें कि नाका थाना क्षेत्र के फतेहगंज स्थित गल्ला मंडी निवासी पानी बताशा बेचने वाले अजय गुप्ता ने मंगलवार को खुदकुशी कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली थी।
बताया जा रहा है कि इस मामले में मृतक की पत्नी अनीता ऋषभ सोनकर सहित तीन लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
अनीता ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि सूदखोर उनके पति को आए दिन परेशान कर रहे थे। बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद घरवाले करीबियों की मदद से अमीनाबाद चौराहे पर शव रखकर जाम लगाते हुए प्रदर्शन किया तब जाकर हरकत में आई पुलिस ने पीड़ित अनीता की तहरीर पर आरोपी सूदखोर ऋषभ सहित तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मामले की छानबीन शुरू की।
बताया जा रहा है कि परिवार का गुजर-बसर करने के लिए अजय गुप्ता अमीनाबाद में सड़क किनारे पानी बताशा बेचते थे। बताया जा रहा है कि आर्थिक तंगी से जूझ रहे अजय ने कुछ रूपए ब्याज पर लिए थे, लेकिन उसे नहीं मालूम था कि जिस बेखौफ सूदखोर उसकी जान के लिए दुश्मन बन जाएंगे। यही हुआ उनकी प्रताड़ना से आजिज आकर अजय गुप्ता को जान देनी तक पड़ गई। गिरफ्तार आरोपी ऋषभ सहित तीन लोग आए दिन गाली-गलौज कर अजय गुप्ता को प्रताड़ित करते थे। इंस्पेक्टर नाका की टीम ने आरोपित शैवी सोनकर उर्फ ऋषभ सोनकर को गिरफ्तार कर शनिवार को सलाखों के पीछे भेज दिया।
कुछ साल पहले शहर में आतंक का पर्याय बने सूदखोरों के खिलाफ अभियान
अधिकारी का ट्रांसफर होती ही पूरी कवायद ठंडे बस्ते में हुई कैद
पानी बताशा बेचने वाले अजय की मौत ने एक बार पुराने जख्मों को किया ताजा
तत्कालीन एसएसपी/डीआईजी आशुतोष पाण्डेय वर्ष 2012 में सूदखोरों के खिलाफ अभियान चलाया था और आतंक का पर्याय बने कई सूदखोर सलाखों के पीछे भी भेजे गए थे।
आपने सूदखोर से ब्याज पर पैसा लिया है और अगर उनकी मनमानी से परेशान हैं तो फिक्र करने की जरूरत नहीं है तत्काल प्रभाव से डीआईजी को एसएमएस कर इसकी जानकारी दें। ताकि सूदखोरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा था कि डरने की जरूरत नहीं है आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षा भी मुहैया कराई जाएगी।
राजधानी में फैले सूदखोरों के मकड़जाल को तोड़ने के तत्कालीन डीआईजी सभी थाना प्रभारियों को सूदखोरों के खिलाफ अभियान चलाने के निर्देश दिए थे। अभियान कुछ महीने तक चला और कई सूदखोर गिरफ्तार होकर जेल भी गए थे। लेकिन जैसे ही उनका तबादला हुआ कि पूरी योजना ठंडे बस्ते में चली गई, नतीजतन सूदखोरों का मकड़जाल इस कदर हावी है कि उनके आगे पुलिस घुटने टेकते हुए नजर आ रही है। इसका जीता-जागता उदाहरण अजय गुप्ता की हुई मौत। सूदखोरों के आतंक से परेशान होकर खुदकुशी कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।




