लखनऊ। उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग के सहयोग से इमेज एंड क्रिएशन वेलफेयर सोसाइटी द्वारा आयोजित पारंपरिक भोजपुरी लोक गायन कार्यशाला का भव्य समापन समारोह, सोमवार 12 अक्टूबर को गोमती नगर स्थित अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान ऑडिटोरियम में हुआ। 3 अक्टूबर से प्रारंभ हुई इस कार्यशाला के प्रशिक्षक वरिष्ठ भोजपुरी लोक गायक अवधेश कुमार त्रिपाठी थे। समापन समारोह में माननीय परिवहन मंत्री, उत्तर प्रदेश दयाशंकर सिंह मुख्य अतिथि एवं उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य माननीय पवन सिंह चौहान विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किये गए थे। इस अवसर पर पद्मश्री से अलंकृत वरिष्ठ साहित्यकार विद्या विंदु सिंह और अखिल भारतीय भोजपुरी समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रभुनाथ राय सहित कई गणमान्य हस्तियां इस अवसर पर उपस्थित रहीं।
आकर्षक सजे-संवरे परिसर में आयोजित इस सांस्कृतिक प्रस्तुति की शुरुआत देवी गीत-अपने बचपन के… से हुई। इस क्रम में प्रतिभागियों द्वारा गायी गई, सोहर-बलमा सुतेला सुख…, लोक गीत-काहे बतिया ई हमसे…, पूर्वी भजन-नाही जानी कौने बतिया पर खफा रसिया…, काजर पराई गीत-माँगे ननदिया कंगनवाँ…, छठ गीत-पनवाँ से पातर…, पचरा गीत-बेरिया की बेरी…, बिरहा एवं दादरा-रोज रतिया निहोरे नयनवाँ… और निर्गुण-तोरा टूटि जाइहैं नथुनी… मधुर कंठ स्वरों में सुनने को मिली। इन गीतों ने न केवल प्रतिभागियों की सूक्ष्म तैयारियों से परिचित करवाया बल्कि भोजपुरी की उन्न्त लोक परंपरा से भी जीवंत रूप से रूबरू करवाया। इस सुरीली कार्यशाला में अनुराधा यादव, शालिनी साहू, नीलिमा सिंह, डॉ. रश्मि उपाध्याय, आभा दीक्षित, भारती वर्मा, शांभवी मिश्रा, बीना त्रिपाठी, मनु रॉय, सोनी श्रीवास्तव, आरती शुक्ला, ऋतु करमचंदानी, सुनीता जैसवाल, अजय पासवान, अलका चतुर्वेदी, किरण सोनी, रजनी सिंह, सीमा अग्रवाल, श्रुति मालवीय एवं सुनीता चौरसिया ने प्रतिभाग किया। समारोह में तबले पर पंडित अनिल महाराज, आर्गन पर पंडित चंद्रेश पांडेय, ऑक्टोपैड पर हर्षित मिश्रा और नगाड़े पर दीन मोहम्मद ने जबरदस्त संगत दी। कार्यक्रम के दौरान संगतकारों एवं कार्यशाला के प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र और प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इमेज एंड क्रिएशन वेलफेयर सोसाइटी के आयोजक कमलेश कुमार पाठक एवं संयोजिका कविता पाठक के नेतृत्व में किया गया। उन्होंने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य भोजपुरी लोक संगीत की पारंपरिक विधाओं को संरक्षित करना, नई पीढ़ी तक लोक संस्कृति की विरासत पहुँचाना तथा उभरते कलाकारों को प्रशिक्षण एवं मंच प्रदान करना था। इस अवसर पर पद्मश्री से अलंकृत वरिष्ठ साहित्यकार विद्या विंदु सिंह और अखिल भारतीय भोजपुरी समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रभुनाथ राय सहित कई गणमान्य हस्तियां इस अवसर पर उपस्थित रहीं।





