न्यूज ऑफ इंडिया (एजेंसी) लखनऊ। लखनऊ खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में अटेवा (ATEWA) एवं NMOPS के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु के समर्थन में जनसंपर्क अभियान तेज हो गया है।
विभिन्न टीमें शिक्षण संस्थानों, कॉलेजों और अन्य संस्थानों का दौरा कर शिक्षकों, कर्मचारियों, युवाओं और विभिन्न वर्गों के लोगों से मुलाकात कर रही हैं तथा विजय कुमार बंधु के पक्ष में मतदान की अपील कर रही हैं।
अटेवा की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जनसंपर्क के दौरान कई स्थानों पर विजय कुमार बंधु को समर्थन मिलने का दावा किया गया है। संगठन का कहना है कि पुरानी पेंशन बहाली, निजीकरण की समाप्ति, टीईटी की अनिवार्यता का मुद्दा, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे विषयों पर उनके लंबे संघर्ष के कारण उन्हें विभिन्न वर्गों का समर्थन मिल रहा है।
संगठन के मुताबिक, विजय कुमार बंधु पिछले 13 वर्षों से सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों के हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार आंदोलन और संघर्ष करते रहे हैं। संगठन का दावा है कि उनकी सक्रियता और जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़ाव उन्हें अन्य प्रत्याशियों से अलग बनाता है। हालांकि, चुनाव में उनकी वास्तविक स्थिति का आकलन मतदान और परिणामों के बाद ही हो सकेगा।
कई शिक्षण संस्थानों में चला जनसंपर्क अभियान
प्रदेश महामंत्री डॉ. नीरजपति त्रिपाठी के नेतृत्व में जनसंपर्क टीम ने रेम्बो पब्लिक स्कूल, सरसवां; प्राथमिक विद्यालय अर्जुनगंज; आइडियल डिग्री कॉलेज, अर्जुनगंज; आदर्श हायर सेकेंडरी स्कूल, अहमामऊ; राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, गोमती नगर; टी.डी. गर्ल्स इंटर कॉलेज, गोमती नगर; सरोज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट; लखनऊ लॉ कॉलेज; सूर्या पब्लिक कॉलेज तथा एस.एम.एस. कॉलेज, गोसाईंगंज का दौरा किया।
वहीं, अटेवा के लखनऊ जिलाध्यक्ष सुनील वर्मा और धीरेन्द्र कुमार के नेतृत्व में दूसरी टीम ने बीकेटी, सदर समेत विभिन्न कॉलेजों और संस्थानों में संपर्क कर विजय कुमार बंधु के समर्थन में मतदान की अपील की।
पेंशन और कर्मचारी हितों के मुद्दे चुनाव के केंद्र में
विजय कुमार बंधु की उम्मीदवारी के समर्थन में चल रहे अभियान में पुरानी पेंशन बहाली, निजीकरण, शिक्षा व्यवस्था, रोजगार और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता दी जा रही है। संगठन इन मुद्दों को शिक्षकों, कर्मचारियों और युवाओं के भविष्य से जोड़ते हुए मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाने में जुटा है।
अब देखना होगा कि जनसंपर्क अभियान के दौरान मिल रहे समर्थन के दावों का चुनाव में कितना असर दिखाई देता है और लखनऊ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता किस प्रत्याशी के पक्ष में अपना फैसला सुनाते हैं।





