November 4, 2026 12:08 am

सुप्रिया श्रीनेत का खुलासा: “सॉफ्टवेयर के जरिए बदले गए हजारों वोटरों के नाम, सुप्रीम कोर्ट तुरंत खारिज करे SIR”

लखनऊ। उ0प्र0 कांग्रेस कमेटी मुख्यालय में आज अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के उ0प्र0 कांग्रेस के प्रभारी श्री राजेंद्र पाल गौतम जी पूर्व मंत्री, उ0प्र0 कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष श्रीमती आराधना मिश्रा‘मोना’ जी विधायक, अ0भा0 कांग्रेस सोशल मीडिया की चेयरमैन-राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमती सुप्रिया श्रीनेत एवं उ0प्र0 कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष एवं सांसद श्री इमरान मसूद ने प्रेसवार्ता को सम्बोधित किया।*

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के उ0प्र0 कांग्रेस के प्रभारी श्री राजेंद्र पाल गौतम जी पूर्व मंत्री ने पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि वोटिंग प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग का एक ऐसा षड्यंत्र है, जिस पर कभी किसी की नजर आसानी से नहीं पड़ सकती। ऐसा तंत्र तैयार किया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार एवं उनकी टीम के नेतृत्व में किसी को भी हराया जा सकता है और किसी को भी जिताया जा सकता है।

उन्होने कहा कि 10 अप्रैल 2026 को उ0प्र0 का एसआईआर का फाइनल ड्राफ्ट जारी हुआ। फाइनल ड्राफ्ट जारी होने के बाद वोटर यह देखकर आश्वस्त हो जाता है कि उसका सीरियल नम्बर, नाम, पता, EPIC नंबर और नाम की स्पेलिंग सही है। उसे लगता है कि अब उसका वोट बन गया है। लेकिन जुलाई से सितंबर के बीच जो डाटा सामने आया है, उसमें विधानसभा क्षेत्र नं. 127-पीलीभीत सदर विधानसभा में 13,150 मतदाताओं के EPIC नंबर और सीरियल नंबर वही रहते हुए अंदर से नाम बदल दिए गए। यानी वोटर को पता ही नहीं चलता कि उसके रिकॉर्ड में बदलाव हो चुका है। उन्होने कहा कि बाद में मतदाता का नाम बदल दिया गया, लेकिन वह यह सोचकर बैठा है कि फाइनल ड्राफ्ट में उसका नाम है। जब वह वोट डालने जाएगा तो उसके पास EPIC कार्ड और पहचान पत्र होने के बावजूद बताया जाएगा कि मतदाता सूची में उसका नाम नहीं है। अब वह किससे शिकायत करेगा? उसका वोट तो चला गया। आखिर उसके नाम पर कौन वोट डालेगा, यह तो चुनाव आयोग ही बता सकता है।

पीलीभीत सदर विधानसभा में कुल 13,150 मतदाताओं के नाम बदले गए। 884 नाम ऐसे मतदाताओं के नाम हटा दिए गए जो अभी भी वहां मौजूद हैं और उन्होंने आवेदन देकर बताया कि वे वहीं रहते हैं। वहीं 2600 ऐसे वोटर जोड़े गए, जो मौके पर रहते ही नहीं हैं। इस तरह एक विधानसभा में कुल 16,554 वोटों का खेल सामने आया है। अब सवाल है कि इस तरह का खेल उत्तर प्रदेश की दूसरी विधानसभाओं में कहां-कहां हुआ होगा?। हमारे कार्यकर्ता हर बूथ पर कितने-कितने नाम बदले गये हैं लिस्ट तैयार की जा रही है। यह बात साफ हो गयी है कि चुनाव आयेाग षडयंत्र कर रहा है इसीलिए आज मीडिया के सामने पुख्ता सबूत रखा गया है।

उ0प्र0 कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष श्रीमती आराधन मिश्रा ‘मोना’ ने प्रेसवार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि मतदाता सूची से नाम गायब होने का मुद्दा गंभीर है और पहले इस तरह की स्थिति के बारे में केवल चुनाव के अंतिम समय में सुनने को मिलता था। उन्होने कहा कि वोटर आईडी कार्ड होने के बावजूद मतदान के दिन वोटर का नाम सूची में नहीं मिलना चिंता का विषय है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इस मुद्दे पर कानूनी राय ली जाएगी। पार्टी का कार्यकर्ता, संगठन और पूरा कैडर SIR प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियों के खिलाफ लड़ाई लड़ेगा। उन्होने SIR की प्रक्रिया को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और उनकी टीम की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह लोकतंत्र की हत्या है।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की सोशल मीडिया की चेयरमैन एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमती सुप्रिया श्रीनेत ने प्रेसवार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि पीलीभीत सदर विधानसभा सीट से योगी सरकार मंे मंत्री संजय गंगवार जो पीलीभीत सदर से विधायक ने 2022 का चुनाव 6,930 वोटों से जीता था। इसी विधानसभा क्षेत्र में 16 हजार से ज्यादा वोटों में गड़बड़ी की गयी है।

श्रीमती सुप्रिया श्रीनेत ने सीमा खन्ना को लेकर भी गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर -टेक्नालाजी के जरिए मतदाताओं के नाम हटाने, जोड़ने और बदलने का काम किया गया। अधिकारियों द्वारा सॉफ्टवेयर का एक्सेस नहीं होने की बात कही जा रही है। सीमा खन्ना ने साफ्टवेयर पर कब्जा करके देश के गद्दार ज्ञानेश कुमार के इशारे पर वोट चोरी का काम किया है। अब वह गायब हैं। अब किसी को नहीं पता कि वह कहां हैं। डीएम, एसडीएम कह रहे हैं कि साफ्टवेयर का एक्सेस नहीं है।

10 अप्रैल 2026 को उत्तर प्रदेश की एसआईआर की फाइनल ड्राफ्ट सूची जारी हुई थी। लोगों ने सूची में अपना नाम देखकर संतोष किया कि उनका नाम मतदाता सूची में मौजूद है। लेकिन आरोप है कि इसके बाद भी मतदाता सूची में बदलाव किए गए। सवाल यह है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी रखने वाली संस्था के स्तर पर ऐसी गड़बड़ियां कैसे हुईं?”

श्रीमती सुप्रिया श्रीनेत से साक्ष्य को मीडिया के सामने रखते हुए कहा कि कुछ नाम वह मीडिया के समक्ष रख रही है। उन्होने कहा कि ड्राफ्ट सूची में EPIC नंबर 4G-MCM-4746 पर मोहम्मद यूसुफ, उम्र 35 वर्ष, पुरुष दर्ज थे। अब उसी EPIC नंबर पर हसरत, पुत्र रमजान अली, उम्र 35 वर्ष, पुरुष नाम दर्ज है। यानी EPIC नंबर, उम्र और लिंग वही हैं, लेकिन मतदाता और पिता का नाम बदल गया। इसी तरह कई अन्य मामलों में भीEPIC नंबर समान रखते हुए नाम और पिता का नाम बदले गये है। ऐसे 13,150 मामले पकड़ में आये है। खास बात यह है कि ये बदलाव अलग-अलग समय पर बैच में हुए और एक पैटर्न दिखाई देता है, जिससे सॉफ्टवेयर के जरिए बदलाव किए जाने का सवाल उठता है।

अगर EPIC नंबर वही रहे लेकिन उस पर किसी दूसरे व्यक्ति का नाम दर्ज हो जाए, तो मतदान के समय मूल मतदाता के सामने पहचान का मिसमैच हो सकता है और वह वोट देने से वंचित रह सकता है। इसलिए सवाल है कि ये बदलाव कैसे हुए, किसके आदेश पर हुए और इसकी जिम्मेदारी किसकी है?”

श्रीमती सुप्रिया श्रीनेत ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट को तत्कालSIR को खारिज कर देना चाहिए। उन्होने कहा कि अगर किसी वोटर का नाम या विवरण EPIC नंबर के जरिए बदला गया है, तो कांग्रेस के जिला कार्यालय और प्रदेश कार्यालय से संपर्क करें। उन्होने दावा किया कि अगर एक विधानसभा क्षेत्र में ऐसा हुआ है, तो अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी इसकी जांच की जानी चाहिए। उन्होने आम जनता से भी अपील की कि वे आज की तारीख में अपना EPIC नंबर चुनाव आयोग की वेबसाइट पर डालकर मतदाता सूची में अपना नाम और विवरण जरूर जांचें। उन्होने कहा कि DM औरSDM से मांग की गई कि अगर मतदाता सूची में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई है, तो वे सामने आकर इसकी पुष्टि करें।

उन्होने कहा कि उत्तर प्रदेश में 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं और 2027 तक नए मतदाताओं के जुड़ने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। वर्ष 2024 में यूपी में करीब 15.41 करोड़ मतदाता थे और हर साल लगभग 35 लाख का नेट इजाफा होता है। 2024 से 2027 के बीच करीब 1.26 करोड़ नए वोट जुड़ने चाहिए थे, जबकि करीब 2.04 करोड़ नाम हटाए जाने की बात सामने आई है। उन्होने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने EPIC नंबरों की जांच कर दस्तावेज जुटाए हैं और ऐसे मामलों की अलग सूची भी तैयार की गई है, जहां EPIC नंबर सेम होने के बाद नामों में बदलाव पाया गया।

उन्होने सवाल कि कि मतदाता सूची में कथित बदलाव किसके निर्देश पर और किस प्रक्रिया के तहत हुए, इसकी जांच की जानी चाहिए। संविधान द्वारा ‘वन पर्सन, वन वोट’ के सिद्धांत के बिना चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।

उ0प्र0 कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष एवं सांसद इमरान मसूद ने प्रेसवार्ता को सम्बोधित करते हुए मतदाता सूची में गड़बड़ियों को लेकर नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र बचाना किसी एक राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने पीलीभीत के पार्टी कार्यकर्ताओं की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने बारीकी से मतदाता सूची की जांच कर इतनी गंभीर विसंगतियों को सामने लाये। उन्होने कहा कि पार्टी इस मामले को लेकर अदालत का रुख भी करेगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे देश और लोकतंत्र को बचाने के लिए अपनी मतदाता सूची में नाम और अन्य विवरणों की जांच करें तथा अपने मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए जागरूक रहें।

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