November 6, 2026 4:57 pm

उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद ने जारी किया आगामी दो सप्ताह का मौसम आधारित कृषि परामर्श

क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप की बैठक में किसानों को खरीफ फसलों की सुरक्षा और जल प्रबंधन की दी गई सलाह

पशुपालकों और मत्स्य पालकों के लिए विशेष परामर्श जारी, आपदा राहत सहायता व हेल्पलाइन की दी गई जानकारी

 

न्यूज ऑफ इंडिया (एजेंसी) लखनऊ।उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह की अध्यक्षता में क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप (वर्ष 2026-27) की सातवीं बैठक संपन्न हुई। बैठक में प्रदेश के मौसम के वर्तमान परिप्रेक्ष्य का आकलन करते हुए किसानों, पशुपालकों एवं मत्स्य पालकों के लिए आगामी दो सप्ताह (04 से 17 सितम्बर, 2026) के लिए कृषि प्रबंधन संबंधी विस्तृत दिशा-निर्देश व महत्वपूर्ण सुझाव जारी किए गए हैं।

मौसम पूर्वानुमान के अनुसार प्रथम सप्ताह (04 से 10 सितम्बर) में प्रदेश के अधिकांश कृषि जलवायु अंचलों में औसत साप्ताहिक वर्षा सामान्य या सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है। इस दौरान भाभर तराई, दक्षिणी-पश्चिमी अर्धशुष्क मैदान के पश्चिमी भाग, मध्य-पश्चिमी और पश्चिमी मैदानी क्षेत्र के अधिकांश भागों में अधिकतम तापमान सामान्य से आंशिक अधिक तथा अन्य अंचलों में सामान्य से आंशिक कम रह सकता है। वहीं द्वितीय सप्ताह (11 से 17 सितम्बर) में उत्तरी-पूर्वी मैदानी क्षेत्र में वर्षा सामान्य से अधिक और शेष अंचलों में सामान्य या सामान्य से कम रहने तथा अधिकांश क्षेत्रों में तापमान सामान्य से आंशिक अधिक रहने की संभावना जताई गई है।

मौसम पूर्वानुमान को देखते हुए किसानों को खरीफ फसलों में जल निकासी की समुचित व्यवस्था करने तथा सिंचाई व कीटनाशकों का छिड़काव स्थगित रखने का सुझाव दिया गया है। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में फसलों, विशेषकर धान में कल्ले व गांठ बनने की अवस्था में नमी बनाए रखने की सलाह दी गई है ताकि भूमि में दरारें न पड़ें। पर्याप्त वर्षा से वंचित क्षेत्रों के सब्जी उत्पादकों को अल्प अवधि व कम पानी वाली फसलों जैसे पालक, मूली, गाजर, शलजम, चुकंदर, मेथी एवं धनिया की खेती करने को कहा गया है। इसके अलावा वातावरण में अधिक ताप व नमी के कारण कीट-रोगों के प्रकोप से बचाव हेतु पर्यावरण हितैषी उपायों जैसे प्रकाश-प्रपंच, बर्ड पर्चर, फेरोमोन ट्रैप, ट्राइकोग्रामा तथा ट्राइकोडर्मा का उपयोग करने और मौसम साफ व हवा स्थिर होने पर ही आवश्यकतानुसार कीटनाशक प्रयोग करने की सलाह दी गई है।

पशुपालकों को पशुओं में वाह्य परजीवी से बचाव के लिए पशुचिकित्सक के परामर्श से दवा प्रयोग करने तथा जनपदीय पशु चिकित्सालयों से खुरपका-मुंहपका बीमारी व गोवंशीय पशुओं में संचालित एल.एस.डी. (लम्पी) के निःशुल्क टीकाकरण का लाभ उठाने को कहा गया है। वर्तमान मौसम को मत्स्य संचय के अनुकूल बताते हुए मत्स्य पालकों को उत्तर प्रदेश मत्स्य विकास निगम की हैचरियों से कतला, रोहू, नैन और ग्रास कार्प प्रजातियों का मत्स्य बीज संचय करने का परामर्श दिया गया है। इसके अतिरिक्त अधिसूचित आपदाओं से जनहानि होने पर पीड़ित परिवारों को 4 लाख रुपये की अहैतुक सहायता दिए जाने का उल्लेख करते हुए किसी भी आपात स्थिति में राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम (1070) अथवा जनपद स्तरीय कंट्रोल रूम (1077) पर संपर्क करने की सलाह दी गई है।

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