गोमतीनगर, तालकटोरा, महानगर सहित कई जगहों पर खूनी होते रहे रिश्ते
अपने ही अपनों का खून बहाकर पुलिस के लिए बन रहे चुनौती
ए अहमद सौदागर लखनऊ। जमीन की लालच, धन की लालच, पति-पत्नी के बीच मामूली बात को लेकर पड़ी दरार या फिर कोई और वजह को लेकर घटनाओं में इजाफा हो रहा है। दो गज जमीन या फिर दंपति के बीच पड़ी दरार में अपने ही काल बन रहे हैं। बीते साल तथा हाल में हुई कई हत्याकांड लालच या मामूली कहासुनी की बात सामने आई। अपनों के ही सिर पर ऐसा खून सवार हुआ कि सात फेरे लेकर जिंदगी बीताने की कसम खाने के बाद भी मौत की नींद सुलाने के बाद रिश्तों को कलंकित किया।
20 अगस्त 2026 को गोमतीनगर इलाके में पति-पत्नी के बीच चल रहे विवाद ने खौफनाक रूप ले लिया। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में लेखाकार मानस वाजपेई अपनी पत्नी बैंक अधिकारी दिव्या मिश्रा और अपनी बहन तूलिका की गोली मारकर हत्या करने के बाद खुद को मौत के गले लगा लिया।
छह सितंबर 2026 को महानगर क्षेत्र के पेपर मिल कॉलोनी में किराए के मकान में रहने वाले हेड कांस्टेबल हिमांशु श्रीवास्तव ने अपनी पत्नी रश्मि श्रीवास्तव की मूसल से सिर कूच कर मौत की नींद सुला दिया।
नौ सितंबर 2026 को तालकटोरा इलाके में किराए के मकान में रहने वाले सैलून कर्मी ने शक के आधार पर अपनी पत्नी रागिनी की गला दबाकर हत्या कर दी।
20 अप्रैल 2026 को चिनहट क्षेत्र में पिता अपनी बेटी को साथी के साथ मिलकर मौत के घाट उतार दिया।
20 जून 2026 को महिगवा क्षेत्र में जमीन की लालच में बेटे ने पिता रामकुमार यादव की बेरहमी से कत्ल कर दिया था।
यह घटनाएं हाल ही में हुई जबकि इससे पहले भी अपनों ने अपनों का खून कर रिश्ते को तार-तार किया। गौर करें तो दो जुलाई 2025 को आलमबाग क्षेत्र में पत्नी से विवाद होने पर दामाद ने सास-ससुर को चाकू मारकर हत्या कर दी।
जनवरी 2022 में विकासनगर सेक्टर दो निवासी इंडियन आयल कारपोरेशन से सेवानिवृत्त महमूद अली खां, उनकी पत्नी दरख्शा और बेटे शावेज की हत्या किसी पेशेवर अपराधी नहीं बल्कि उन्हीं के बड़े बेटे सरफराज हत्या की थी।
16 अप्रैल 2024 को गुडंबा थाना क्षेत्र के मायापुरी में एक शख्स ने अपनी 14 साल की बेटी की निर्मम तरीके से हत्या कर दी। यह तो महज बानगी भर है और भी कई लोगों ने जमीन की लालच या फिर कोई और वजह को लेकर अपनों का खून बहा चुके हैं।
खबर में दर्शायी गई ये घटनाएं महज एक नजीर, जिनमें लोगों ने अपनों का खून बहाने में जरा भी हिचक नहीं दिखाई। इस मामले में सवाल करने पर एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि अब लोगों में सहनशीलता की भावना कम होती जा रही है। वहीं लोगों की इच्छाएं लगातार बढ़ रहीं हैं और उनके संसाधन सीमित हैं। कहीं परिवारीजनों के बीच उपजा क्रोध सामाजिक रिश्ते की बुनियाद में दरार डाल रहा है तो कहीं सम्मान की रक्षा में लोग अपनों का ही खून बहाने से परहेज़ नहीं कर रहे हैं।




