लखनऊ। फेडरेशन ऑफ़ अर्बन रेजिडेंट्स (फर्ज़) फ़ॉर जस्टिस के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के उपाध्यक्ष महोदय से भेंट की। प्रतिनिधिमंडल ने नगर की ज्वलंत समस्याओं से जुड़े तीन प्रमुख विषयों पर लिखित अभ्यावेदन प्रस्तुत किए। इस प्रतिनिधिमंडल में महासंघ के अध्यक्ष श्री आलोक सिंह (अधिवक्ता), उपाध्यक्ष कर्नल (से.नि.) राजेन्द्र यादव तथा कार्यकारिणी सदस्य डॉ. अंजू वार्ष्णेय सम्मिलित रहे।
वर्षा जल संचयन पर 147 पृष्ठ की रिपोर्ट सौंपी
महासंघ ने लखनऊ के बहुमंजिला अपार्टमेंट परिसरों एवं सरकारी भवनों में स्थापित वर्षा जल संचयन प्रणालियों की स्थिति पर तैयार की गई 147 पृष्ठों की विस्तृत सर्वेक्षण रिपोर्ट उपाध्यक्ष महोदय को सौंपी। उपाध्यक्ष महोदय ने विषय की गंभीरता को समझते हुए रिपोर्ट को त्वरित क्रियान्वयन हेतु चिन्हित किया।
प्रतिनिधिमंडल ने जोर देकर कहा कि गोमती नदी पर प्रस्तावित लगभग 25 करोड़ रुपये के लेज़र शो जैसे साज-सज्जा के कार्यों को टालकर, बंद पड़ी वर्षा जल संचयन प्रणालियों को पुनर्जीवित करने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। गिरते भूजल स्तर वाले लखनऊ शहर में भूजल पुनर्भरण को सौंदर्यकरण से नीचे नहीं रखा जा सकता।
उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट अधिनियम, 2010 में प्रस्तावित संशोधन
राज्य सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट अधिनियम, 2010 में संशोधन की प्रक्रिया जारी है। विगत दस वर्षों से आवंटियों के हितों के लिए कार्यरत महासंघ ने अनुरोध किया कि संशोधन हेतु गठित किसी भी समिति में महासंघ को प्रतिनिधित्व दिया जाए, ताकि धरातली अनुभवों के आधार पर एक प्रभावी कानून बन सके।
जनसुनवाई अधिकारियों की उपलब्धता हेतु लाइव डैशबोर्ड की मांग
महासंघ ने मांग की कि जनता से मिलने वाले सरकारी अधिकारियों की कार्यालय समय-सारणी का एक एकीकृत ‘लाइव ऑनलाइन डैशबोर्ड’ बनाया जाए। यदि कोई अधिकारी अवकाश या मुख्यालय से बाहर हो, तो इसकी जानकारी कम से कम एक दिन पूर्व अद्यतन की जाए। इससे दूर-दराज से आने वाले नागरिकों, विशेषकर महिलाओं, वृद्धजनों और दैनिक मजदूरों के समय, धन और उत्पादकता की बचत होगी।
“हम उपाध्यक्ष महोदय के आभारी हैं कि उन्होंने सर्वेक्षण को गंभीरता से लिया। जो वर्षा जल संचयन प्रणाली स्वीकृत मानचित्र पर विद्यमान हो और धरातल पर बंद पड़ी हो, वह किसी की रक्षा नहीं करती। हमारा अनुरोध केवल इतना है कि नगर पहले उस पर व्यय करे जो उसे जीवित रखता है।”
— आलोक सिंह (अधिवक्ता), कर्नल (से.नि.) राजेंद्र यादव, डॉ. अंजू वार्ष्णेय




